मोतिहारी में आध्यात्मिक एवं धार्मिक नेतृत्व संवाद, 102 साधु-संतों का मिला सान्निध्य
डॉ. कृष्ण गोपाल ने भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और समाजजीवन में आध्यात्मिक मूल्यों की भूमिका पर किया मार्गदर्शन
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वीएसके डेस्क
October 17, 2026
समाचार › संघ व विविध संगठन
मोतिहारी, बिहार। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, चंपारण के तत्वावधान में मोतिहारी स्थित रैमसन प्लाजा में आध्यात्मिक एवं धार्मिक नेतृत्व संवाद का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह-सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल ने भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और समाजजीवन में आध्यात्मिक मूल्यों की भूमिका पर विचार रखे। संवाद में विभिन्न मठों के महंतों, साधु-संतों, संन्यासियों, कथावाचकों, गुरुद्वारों के ग्रंथियों तथा आध्यात्मिक संगठनों के प्रमुखों सहित लगभग 102 संतों एवं प्रबुद्धजनों ने भाग लिया।
आयोजकों के अनुसार, कार्यक्रम में 57 मठों के महंतों और 22 विभिन्न आध्यात्मिक संगठनों के प्रमुखों एवं कथावाचकों की सहभागिता रही। संवाद का उद्देश्य भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा के संरक्षण, सामाजिक समरसता तथा वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों में आध्यात्मिक नेतृत्व की भूमिका पर विचार-विमर्श करना था।
संत-परंपरा समाज की सांस्कृतिक चेतना की संवाहक: डॉ. कृष्ण गोपाल
कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता के चित्र पर पुष्पार्चन के साथ हुआ। इसके बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, मोतिहारी के सह-जिला संपर्क प्रमुख डॉ. नरेंद्र सिंह ने मंचासीन अतिथियों का परिचय कराया। संघ के कार्यकर्ताओं ने उपस्थित साधु-संतों का परिचय प्रस्तुत किया। इस अवसर पर जिला संघचालक सुशील पाण्डेय, नगर संघचालक उदय नारायण, सह विभाग व्यवस्था के जितेंद्र त्रिपाठी तथा विश्व हिंदू परिषद के उत्तर-पूर्व क्षेत्र के विधि प्रमुख अशोक जी सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।
उत्तर बिहार प्रांत के प्रांत सह संघचालक प्रो. राजकिशोर ने विषय की प्रस्तावना रखते हुए संघ के शताब्दी वर्ष के दौरान आयोजित कार्यक्रमों और पंच परिवर्तन के उद्देश्यों का उल्लेख किया। उन्होंने सामाजिक सद्भाव और समरसता को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।
अपने उद्बोधन में डॉ. कृष्ण गोपाल ने कहा कि भारतीय परंपरा में साधु-संतों की भूमिका केवल आध्यात्मिक मार्गदर्शन तक सीमित नहीं रही है। संतों ने समाज को संस्कारित करने, जीवनमूल्यों को सुरक्षित रखने और लोककल्याण की भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। संत-परंपरा भारतीय समाज की सांस्कृतिक चेतना की संवाहक रही है।
उन्होंने भारतीय जीवन-दृष्टि में धर्म, समाज और राष्ट्र के परस्पर संबंधों पर चिंतन की आवश्यकता भी रेखांकित की। उनके उद्बोधन में सेवा, सदाचार, करुणा, आत्मानुशासन और लोककल्याण जैसे मूल्यों को सामाजिक जीवन में अपनाने पर जोर रहा। उन्होंने आध्यात्मिक नेतृत्व को इन मूल्यों के प्रसार और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने में महत्वपूर्ण बताया।
समसामयिक विषयों पर संतों ने रखे विचार
डॉ. कृष्ण गोपाल के उद्बोधन के बाद साधु-संतों और आध्यात्मिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ संवाद आयोजित किया गया। इसमें विभिन्न संतों ने अपने मठों, मंदिरों और आध्यात्मिक संस्थाओं की गतिविधियों, समाज के साथ उनके जुड़ाव तथा धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण से जुड़े विषयों पर विचार साझा किए।
संवाद के दौरान सामाजिक एकता, शांति, सद्भाव और समरसता को बढ़ावा देने में धार्मिक एवं आध्यात्मिक संस्थाओं की भूमिका पर चर्चा हुई। संतों ने अपने अनुभव साझा करते हुए समाज के व्यापक हितों से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श किया।
समापन सत्र में डॉ. कृष्ण गोपाल ने चर्चा का सार प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का समापन कल्याण मंत्र के साथ हुआ। चंपारण के विभाग संघचालक राजकिशोर ने कार्यक्रम में शामिल सभी संतों, महंतों और आध्यात्मिक संगठनों के प्रतिनिधियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अनुपम कुमार वर्मा ने किया।
कई संत-महात्मा और संघ कार्यकर्ता रहे उपस्थित
कार्यक्रम में श्री श्री 108 पूज्य रवि शंकर जी, राम बालक जी, टंगुलिया बाबा, फलाहारी बाबा, त्यागी बाबा और मुरारी पांडे सहित विभिन्न आध्यात्मिक संगठनों के प्रतिनिधि एवं संत-महंत उपस्थित रहे।
आयोजन के सफल संचालन में उत्तर बिहार प्रांत के प्रांत प्रचारक रवि शंकर जी, विजय जयसवाल, कृष्ण कुमार, अरुण सिन्हा, अभिषेक पाण्डेय, शिवम सोनू, रविशंकर, अरुण दूबे, सतीश टंडन, जयगोविंद, अशोक और रवि अग्रहरि सहित अन्य कार्यकर्ताओं का सहयोग रहा।