मुद्रा और स्वास्थ्य
By
चंद्रशेखर
January 08, 2026
पुस्तक समीक्षा
पुस्तक : “मुद्रा और स्वास्थ्य”
लेखक – श्रीवर्धन
योग एवं आयुर्वेद की समृद्ध भारतीय परंपरा में मुद्राओं का विशेष स्थान रहा है। इसी प्राचीन ज्ञान को आधुनिक जीवनशैली के संदर्भ में सरल और व्यावहारिक रूप में प्रस्तुत करने का सराहनीय प्रयास लेखक श्रीवर्धन ने अपनी पुस्तक “मुद्रा और स्वास्थ्य” में किया है। यह पुस्तक न केवल योग साधकों के लिए, बल्कि सामान्य जन व मेडिकल छात्रों व चिकित्सकों के लिए भी एक उपयोगी सिद्ध होगी ।
इस पुस्तक में लेखक ने कुल 46 प्रमुख मुद्राओं का विस्तारपूर्वक वर्णन किया है। प्रत्येक मुद्रा के साथ उसके अभ्यास की विधि, लाभ तथा स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव को सहज भाषा में समझाया गया है। लेखक का दृष्टिकोण यह स्पष्ट करता है कि मुद्राएँ केवल आध्यात्मिक साधना नहीं बल्कि शरीर, मन और प्राण ऊर्जा के संतुलन का प्रभावी साधन हैं।
पुस्तक का दार्शनिक आधार योग एवं आयुर्वेद के पंचमहाभूत सिद्धांत पर आधारित है। लेखक बताते हैं कि मानव शरीर पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश—इन पाँच तत्वों से निर्मित है तथा हाथों की उँगलियाँ इन तत्वों का प्रतिनिधित्व करती हैं। जब इन तत्वों में असंतुलन होता है, तब रोग उत्पन्न होते हैं। विशेष मुद्राओं के अभ्यास से इन तत्वों का संतुलन स्थापित कर स्वास्थ्य को बनाए रखा जा सकता है।
पुस्तक की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसमें मुद्राओं के प्रभाव को केवल पारंपरिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि आधुनिक वैज्ञानिक सोच से भी जोड़ा गया है। उँगलियों में स्थित तंत्रिका अंत (nerve endings) के माध्यम से मस्तिष्क और स्वायत्त तंत्रिका तंत्र पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभावों को सरल शब्दों में समझाया गया है। इससे पाठक को यह समझने में सहायता मिलती है कि मुद्राएँ तनाव, चिंता, अनिद्रा, पाचन विकार और जीवनशैली से जुड़ी अनेक समस्याओं में कैसे सहायक हो सकती हैं।
इस पुस्तक की विश्वसनीयता और गरिमा इस तथ्य से और भी बढ़ जाती है कि इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत, स्वामी सत्य मित्रानंद सहित अनेक प्रतिष्ठित संतों, विचारकों और गणमान्य व्यक्तियों ने प्रस्तावित किया है। यह समर्थन पुस्तक के सामाजिक, सांस्कृतिक और स्वास्थ्य संबंधी महत्व को रेखांकित करता है।
लेखक ने यह भी स्पष्ट किया है कि मुद्राएँ किसी रोग के चिकित्सकीय उपचार का विकल्प नहीं हैं बल्कि पूरक चिकित्सा (adjunct therapy) के रूप में कार्य करती हैं। सही आहार, नियमित व्यायाम और आवश्यक औषधीय उपचार के साथ यदि मुद्राओं का अभ्यास किया जाए, तो स्वास्थ्य लाभ कई गुना बढ़ सकते हैं। यह संतुलित दृष्टिकोण पुस्तक को व्यावहारिक और जिम्मेदार बनाता है।
समग्र रूप से देखा जाए तो पुस्तक “मुद्रा और स्वास्थ्य” का अंग्रेजी रूपांतरण एक सरल, सुलभ और उपयोगी साहित्य है, जो व्यक्ति को अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाती है और आत्म-नियंत्रण व अनुशासन की ओर प्रेरित करती है। यह पुस्तक उन सभी पाठकों के लिए अत्यंत उपयोगी है, जो बिना किसी दुष्प्रभाव के, प्राकृतिक और सहज उपायों द्वारा शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाना चाहते हैं।
डॉ. लाखन पोसवाल
वरिष्ठ आचार्य, शिशु औषध
जवाहर लाल नेहरु मेडिकल कॉलेज, अजमेर