राजस्थान विश्वविद्यालय में ABVP का प्रदर्शन, ‘अराजकता हटाओ, संविधान अपनाओ’ का दिया नारा
By
वीएसके डेस्क
October 16, 2026
समाचार › संघ व विविध संगठन
जयपुर। राजस्थान विश्वविद्यालय में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) की विश्वविद्यालय इकाई के कार्यकर्ताओं ने ‘अराजकता हटाओ, संविधान अपनाओ’ नारे के साथ प्रदर्शन किया। परिषद ने इस दौरान राष्ट्रीय एकता, संवैधानिक मूल्यों और राष्ट्रहित से जुड़े मुद्दों को उठाते हुए कथित अराजकता फैलाने वाली विचारधाराओं का विरोध किया।
ABVP कार्यकर्ताओं ने कहा कि लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ संविधान की मर्यादा, राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने की जिम्मेदारी भी जुड़ी है। परिषद ने विद्यार्थियों से विश्वविद्यालय परिसर में सकारात्मक वातावरण बनाने और संवैधानिक मूल्यों के प्रति सम्मान रखने का आह्वान किया।
राष्ट्रहित और संवैधानिक मूल्यों पर दिया जोर
प्रदर्शन के दौरान परिषद ने भारत की परिस्थितियों की तुलना बांग्लादेश और नेपाल से करने तथा देश में अस्थिरता से जुड़े विचारों का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने की बात कही। संगठन का कहना है कि विद्यार्थियों के बीच राष्ट्रहित, सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता की भावना मजबूत करना आवश्यक है।
परिषद राष्ट्रहित, राष्ट्रीय एकता और संवैधानिक मूल्यों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है
ABVP के प्रदेश मंत्री शुभेंद्र सिंह निर्वाण ने कहा कि परिषद राष्ट्रहित, राष्ट्रीय एकता और संवैधानिक मूल्यों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि देश की एकता और अखंडता को कमजोर करने वाली विचारधाराओं का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध किया जाना चाहिए और ऐसे मुद्दों पर तथ्यों तथा तर्कों के आधार पर अपनी बात रखनी चाहिए।
निर्वाण ने विश्वविद्यालयों को शिक्षा, संवाद और राष्ट्रनिर्माण के केंद्र बताते हुए कहा कि परिसरों में अनुशासन, वैचारिक स्पष्टता और संवैधानिक मूल्यों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से देश की एकता, अखंडता और गौरव को मजबूत करने में अपनी भूमिका निभाने का आह्वान किया।
विद्यार्थियों के हितों के लिए काम जारी रखने का संकल्प
ABVP ने कहा कि वह विद्यार्थियों के हितों, राष्ट्रीय एकता और संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करने के लिए लगातार कार्य करती रहेगी। परिषद के अनुसार, प्रदर्शन का उद्देश्य विद्यार्थियों के बीच राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी और संवैधानिक मर्यादाओं के सम्मान का संदेश देना था।