आरएसएस का शताब्दी वर्ष उत्सव का नहीं, राष्ट्र निर्माण के संकल्प का समय: रमेश पप्पा
By
चंद्रशेखर
April 12, 2026
समाचार › संघ व विविध संगठन
जयपुर,12 अप्रैल| राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, मालवीय नगर द्वारा आयोजित प्रमुख जन गोष्ठी में संघ के अखिल भारतीय सह संपर्क प्रमुख रमेश पप्पा ने मुख्य वक्ता के रूप में प्रबुद्ध समाज को संबोधित किया। संघ के स्थापना के 100वें वर्ष में प्रवेश के अवसर पर उन्होंने स्पष्ट किया कि यह समय केवल उत्सव मनाने का नहीं, बल्कि आगामी दशक के लिए नए संकल्प लेने का है।
शताब्दी वर्ष का संगठनात्मक लक्ष्य:
संबोधन के दौरान उन्होंने बताया कि वर्तमान में संघ की देश भर में लगभग 90,000 शाखाएँ हैं, जिन्हें शताब्दी वर्ष तक एक लाख पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने संघ के गौरवशाली इतिहास और केरल, पंजाब एवं जम्मू-कश्मीर जैसे क्षेत्रों में राष्ट्र की एकता के लिए स्वयंसेवकों द्वारा दिए का भी स्मरण किया।
आगामी दशक के लिए 'पंच परिवर्तन' का आह्वान:
रमेश पप्पा ने समाज में स्थायी सकारात्मक बदलाव के लिए पंच परिवर्तन के पाँच सूत्रों पर बात रखी।
1. कुटुंब प्रबोधन: परिवार को संस्कारों का केंद्र बनाना। सप्ताह में एक बार पूरा परिवार बिना मोबाइल के साथ बैठकर भोजन और संवाद करें।
2. सामाजिक समरसता: जात-पात के भेदभाव को मिटाकर "एक मंदिर, एक श्मशान और एक जलाशय" के भाव को समाज में लागू करना।
3. 'स्व' का बोध: गुलामी की मानसिकता त्याग कर अपनी भाषा, भूषा, भोजन और भजन (स्वदेशी) पर गर्व करना।
4. पर्यावरण संरक्षण: जल और बिजली की बचत, प्लास्टिक का त्याग और अन्न की बर्बादी रोकना।
5. नागरिक अनुशासन: विकसित भारत के लिए नागरिकों में शिष्टाचार और कर्तव्यों के प्रति जागरूकता लाना।
विश्व गुरु की भूमिका में भारत:
मुख्य वक्ता ने कहा कि आज पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन और संघर्षों के समाधान के लिए भारत की ओर देख रही है। 'वसुधैव कुटुंबकम' के विचार के साथ भारत फिर से विश्व गुरु की भूमिका निभाने के लिए तैयार हो रहा है। गोष्ठी के अंत में समाज के प्रबुद्ध वर्ग से इन पाँच परिवर्तनों को अपने जीवन में उतारने का आह्वान किया गया