नशे की पहुंच छोटे कस्बों और शिक्षण परिसरों तक, भावी पीढ़ी को बचाने समाज जागरण जरूरी : निंबाराम
नशा व्यक्ति ही नहीं परिवार और आने वाली पीढ़ियों को भी करता है प्रभावित
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डॉ. ईश्वर बैरागी
September 27, 2026
समाचार
जयपुर, 27 सितंबर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के राजस्थान क्षेत्र प्रचारक निंबाराम ने कहा कि नशे का प्रभाव अब केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है। इसकी पहुंच छोटे कस्बों, ग्रामीण क्षेत्रों और शैक्षणिक परिसरों तक होना चिंता का विषय है। नशा व्यक्ति के साथ परिवार, सामाजिक शांति और आने वाली पीढ़ियों को भी प्रभावित करता है। इसलिए नशे के खिलाफ अभियान को केवल किसी संगठन की गतिविधि नहीं, बल्कि व्यापक समाज जागरण का विषय बनाना होगा।
निंबाराम रविवार को डॉक्टर हेडगेवार स्मृति सेवा प्रन्यास, जयपुर की ओर से आयोजित ‘नशामुक्त परिवार, स्वस्थ समाज और सशक्त राष्ट्र’ विषयक नशा मुक्ति अभियान कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि नशामुक्ति को लेकर यह शुरुआत है। आगे इसे समाज के विभिन्न वर्गों तक ले जाने के लिए व्यवस्थित योजना तैयार करनी होगी।
उन्होंने कहा कि समाज को सशक्त बनाने के लिए उसका स्वस्थ होना जरूरी है। कुपोषण, शिक्षा और संस्कारों के अभाव जैसी चुनौतियों के साथ नशा भी समाज के सामने बड़ी समस्या है। नशे की कई आदतें लंबे समय से समाज में मौजूद हैं और कई बार एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचती हैं। समय के साथ इनके स्वरूप और तरीके भी बदल रहे हैं।
आदत से कब लत बन जाए, पता नहीं चलता
निंबाराम ने कहा कि नशे की शुरुआत कई बार सीमित प्रयोग या छोटी-सी आदत से होती है, लेकिन धीरे-धीरे यही आदत लत का रूप ले लेती है। व्यक्ति की नशे की तलब उसके व्यवहार और पारिवारिक जीवन को प्रभावित करने लगती है। आज नशे के कई रूप सामने हैं पीने, सूंघने, लगाने और इंजेक्शन के माध्यम से भी नशा किया जा रहा है। ऐसे में युवाओं और किशोरों को इसके प्रकार और दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि बड़े शहरों और उच्च शिक्षण संस्थानों के साथ अब छोटे कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी नशे का प्रभाव दिखाई दे रहा है। इसे केवल वर्तमान की समस्या न मानकर आने वाली पीढ़ियों पर पड़ने वाले प्रभाव के रूप में देखना होगा।
इस अवसर पर जैन संत उपाध्याय श्री 108 उर्जयन्तसागर जी महाराज ने कहा कि जरूरत केवल नशामुक्त होने की नहीं, बल्कि नशे से मुक्ति की है। नशा केवल पदार्थों का नहीं होता, वह ऐसी हर आदत है जो चरित्र, संस्कार, संस्कृति और व्यक्तित्व का घात करती है। उन्होंने कहा कि देश का भविष्य युवाओं से तय होता है और यदि युवा सुरक्षित, व्यवस्थित, संकल्पित और संगठित हों तो कोई देश को नीचे नहीं ला सकता। आज डिप्रेशन और ओवरथिंकिंग भी नशे की समस्या का कारण बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि नशे से मुक्ति केवल सरकार या संगठन की जिम्मेदारी नहीं, यह हमारी नैतिक जिम्मेदारी है।
कार्यशाला में प्रतिभागियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में नशे के प्रचलन और उसके दुष्प्रभावों से जुड़े अनुभव साझा किए तथा स्थानीय स्तर पर नशामुक्ति अभियान को आगे बढ़ाने को लेकर चर्चा की।