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युवा उत्थान संगोष्ठी में आधुनिकता और नैतिकता के संतुलन पर हुआ चिंतन

युवा केवल परिवर्तन का सहभागी नहीं, समाज और राष्ट्र के पुनर्निर्माण का प्रमुख आधार: निम्बाराम

By चंद्रशेखर April 12, 2026
समाचार › संघ व विविध संगठन
युवा उत्थान संगोष्ठी में आधुनिकता और नैतिकता के संतुलन पर हुआ चिंतन
जयपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, मालवीय भाग (जयपुर महानगर) द्वारा शनिवार को महात्मा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ गवर्नेंस एंड सोशल साइंस, जयपुर में ‘युवा उत्थान’ विषयक युवा केंद्रित संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी में 18 से 35 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं ने उत्साहपूर्वक भागीदारी निभाई। कार्यक्रम में कला, साहित्य, न्याय, चिकित्सा, शिक्षा एवं अन्य विविध क्षेत्रों से जुड़े युवाओं की उपस्थिति रही। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र प्रचारक निंबाराम रहे। अपने उद्बोधन में उन्होंने “आधुनिकता और नैतिकता के संतुलन” की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान युग में तीव्र तकनीकी प्रगति और वैश्विक प्रभावों के बीच युवाओं के समक्ष अनेक चुनौतियाँ हैं, किंतु इन परिस्थितियों में भी अपने मूल्यों, संस्कारों और सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने आगे कहा कि युवा वर्ग केवल परिवर्तन का सहभागी ही नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के पुनर्निर्माण का प्रमुख आधार है। यदि युवा आधुनिक साधनों और तकनीकों का सदुपयोग करते हुए नैतिक मूल्यों के साथ आगे बढ़े, तो भारत के उज्ज्वल भविष्य का मार्ग प्रशस्त होगा। अपने वक्तव्य में निंबाराम ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के प्रभाव, पारंपरिक खेलों के संरक्षण, तथा राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका जैसे समसामयिक विषयों पर विस्तार से मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे तकनीकी उन्नति को अपनाते हुए उसके दुष्प्रभावों से सजग रहें तथा अपनी रचनात्मकता और मानवीय संवेदनाओं को बनाए रखें। संगोष्ठी के दौरान युवाओं ने सामाजिक, सांस्कृतिक एवं राष्ट्रीय विषयों से जुड़े अनेक प्रश्न प्रस्तुत किए। मुख्य वक्ता द्वारा इन प्रश्नों के उत्तर विस्तारपूर्वक दिए गए। विशेष रूप से कृत्रिम बुद्धिमत्ता, पारंपरिक खेलों के पुनर्जीवन, सामाजिक समरसता, जातिगत भेदभाव, एवं मृत्यु भोज जैसी सामाजिक कुरीतियों पर सारगर्भित चर्चा हुई। इस संवाद ने युवाओं को संतुलित, सकारात्मक एवं राष्ट्रोन्मुख दृष्टिकोण अपनाने हेतु प्रेरित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मालवीय भाग के संघचालक राममोहन गर्ग ने की। कार्यक्रम का समापन ‘वंदे मातरम्’ के सामूहिक गायन के साथ हुआ।

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