आसमान में भारत की नई निगरानी क्षमता का ट्रायल सफल, 21 किमी की ऊंचाई तक पहुंचा स्वदेशी HAPS
By
वीएसके डेस्क
October 08, 2026
समाचार › देश-विशेष
नई दिल्ली। भारत ने ऊंचाई वाले क्षेत्रों में लगातार निगरानी और संचार क्षमता विकसित करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने स्वदेशी हाई-एल्टीट्यूड प्लेटफॉर्म सिस्टम (HAPS) का सफल उड़ान परीक्षण किया है। परीक्षण के दौरान यह प्लेटफॉर्म समुद्र तल से करीब 21 किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुंचा और इसके बाद लगभग 20 किलोमीटर की ऊंचाई पर 30 मिनट से अधिक समय तक सफलतापूर्वक उड़ान भरता रहा।
इस परीक्षण की खास बात यह रही कि HAPS से उड़ान के दौरान प्राप्त वीडियो और अन्य महत्वपूर्ण आंकड़े लगातार ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन तक भेजे गए। इससे वैज्ञानिकों को ऊंचाई पर प्लेटफॉर्म के प्रदर्शन, नियंत्रण और अन्य प्रणालियों की वास्तविक स्थिति का आकलन करने में मदद मिली।
समताप मंडल में उड़ान क्षमता का प्रदर्शन
HAPS को खास तौर पर धरती की सतह से काफी ऊंचाई पर लंबे समय तक काम करने के उद्देश्य से विकसित किया जा रहा है। परीक्षण में 21 किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुंचना इस परियोजना के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है, क्योंकि यह क्षेत्र पृथ्वी के समताप मंडल (Stratosphere) का हिस्सा है।
परीक्षण के दौरान प्लेटफॉर्म को लगभग 20 किलोमीटर की ऊंचाई पर आधे घंटे से अधिक समय तक बनाए रखा गया। मिशन पूरा होने के बाद इसे नियंत्रित तरीके से वापस जमीन पर लाया गया। उड़ान के दौरान जुटाए गए डेटा का अब आगे के विकास और परीक्षणों के लिए विश्लेषण किया जा रहा है।
HAPS में लगे हैं कई आधुनिक सिस्टम
इस स्वदेशी प्लेटफॉर्म में ऊंचाई पर उड़ान और निगरानी से जुड़े कई इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम लगाए गए हैं। इनमें इनर्शियल मेजरमेंट यूनिट (IMU), GPS रिसीवर, ऑनबोर्ड कैमरे और ऊंचाई नियंत्रण प्रणाली प्रमुख हैं।
इन प्रणालियों की मदद से HAPS की स्थिति, दिशा, ऊंचाई और उड़ान से जुड़े दूसरे मानकों पर नजर रखी जा सकती है। परीक्षण के दौरान रियल-टाइम वीडियो और उड़ान संबंधी डेटा को जमीन पर भेजा जाना भी इसकी तकनीकी क्षमता का अहम हिस्सा रहा।
निगरानी से लेकर संचार तक हो सकता है इस्तेमाल
HAPS की उपयोगिता केवल एक सामान्य विमान की तरह उड़ान भरने तक सीमित नहीं है। इस तरह के प्लेटफॉर्म को लंबे समय तक ऊंचाई पर एक निश्चित क्षेत्र के ऊपर काम करने के लिए विकसित किया जाता है।
भविष्य में ऐसी तकनीक का इस्तेमाल हवाई निगरानी, पृथ्वी अवलोकन, संचार नेटवर्क को मजबूत करने, सीमावर्ती क्षेत्रों की निगरानी और आपदा के समय संचार सहायता जैसे कार्यों में किया जा सकता है। इसकी ऊंचाई पारंपरिक विमानों से काफी अधिक होती है, जबकि उपग्रहों की तुलना में इसे अपेक्षाकृत कम ऊंचाई पर संचालित किया जा सकता है।
DRDO की ADRDE प्रयोगशाला कर रही है विकास
HAPS परियोजना के विकास का काम आगरा स्थित DRDO की एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (ADRDE) द्वारा किया जा रहा है। इस परीक्षण से प्राप्त आंकड़े आगे प्लेटफॉर्म की क्षमता बढ़ाने और लंबे समय तक ऊंचाई पर संचालन से जुड़ी तकनीक को बेहतर बनाने में उपयोग किए जाएंगे।
परीक्षण को सफल बनाने में DRDO के अलावा भारतीय वायुसेना, CEMILAC, DGCA, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) और अन्य संबंधित एजेंसियों ने भी सहयोग किया।
राजनाथ सिंह ने दी बधाई
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने HAPS के सफल उड़ान परीक्षण के लिए DRDO, भारतीय वायुसेना, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और औद्योगिक भागीदारों को बधाई दी। उन्होंने इसे उन्नत एयरोस्पेस तकनीक के क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भर क्षमता को आगे बढ़ाने वाली महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
इस परीक्षण के साथ भारत ने उच्च ऊंचाई पर लंबे समय तक काम करने वाले स्वदेशी प्लेटफॉर्म के विकास में एक और महत्वपूर्ण चरण पार किया है। आने वाले परीक्षणों में इसके प्रदर्शन से मिले आंकड़ों के आधार पर HAPS की क्षमताओं को और विकसित किए जाने की उम्मीद है।