अंतरराष्ट्रीय शैक्षिक शोध संगोष्ठी का समापन, निंबाराम बोले- आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को मुख्यधारा में लाना पूरे समाज का दायित्व
समाज के सर्वांगीण विकास का मार्ग दिखाता है दीनदयाल का एकात्म मानवदर्शन
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चंद्रशेखर
September 23, 2026
समाचार › राजस्थान विविध
जयपुर, 22 सितंबर। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर परिसर एवं पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति समारोह समिति, जयपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय शैक्षिक शोध संगोष्ठी का मंगलवार को समापन हुआ। ‘पंडित दीनदयाल उपाध्याय : एकात्म मानवदर्शन एवं भारतीय ज्ञान परंपरा’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी के समापन सत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तर-पश्चिम क्षेत्र प्रचारक निंबाराम ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय के कथनी और करनी में कोई अंतर नहीं था। उन्होंने अपने चिंतन और कार्य के माध्यम से समाज के सर्वांगीण विकास का मार्ग प्रस्तुत किया।
निंबाराम ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने एकात्म मानवदर्शन को परिभाषित करते हुए ऐसी व्यवस्था की कल्पना की, जिसमें भारत के लोग जीवन के सभी क्षेत्रों में समुन्नति प्राप्त करें। उनके चिंतन में ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना को विशेष स्थान प्राप्त था। उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय के लिए विकास का वास्तविक अर्थ समाज के अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति का उत्थान था। अंत्योदय के माध्यम से उन्होंने अंतिम व्यक्ति की उन्नति को ही विकसित भारत की संकल्पना का आधार माना।
उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को समाज की मुख्यधारा में लाना केवल शासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज का दायित्व है। समाज के सभी वर्गों को मिलकर इस दिशा में प्रयास करने की आवश्यकता है।
निंबाराम ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय की आदर्श गांव की संकल्पना का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे गांव विकसित होने चाहिए, जहां सामूहिक सभा, प्रवचन, शिक्षा और संस्कार की व्यवस्था हो तथा लोग परस्पर सहयोग और सामाजिक समरसता के साथ आगे बढ़ें।
समापन सत्र की अध्यक्षता जगद्गुरु रामानंदाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर के कुलपति प्रो. मदन मोहन झा ने की। विशिष्ट अतिथि पूर्व कुलपति एवं दीनदयाल उपाध्याय समारोह समिति के अध्यक्ष प्रो. मोहनलाल छीपा रहे। कार्यक्रम में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर परिसर के प्रभारी निदेशक प्रो. श्रीधर मिश्र, सह निदेशक प्रो. विष्णुकांत पाण्डेय सहित शिक्षक, शोधार्थी एवं प्रतिभागी उपस्थित रहे।
संगोष्ठी में पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानवदर्शन, अंत्योदय, भारतीय ज्ञान परंपरा और समकालीन शिक्षा के संदर्भ में विभिन्न विद्वानों ने अपने शोध-पत्र एवं विचार प्रस्तुत किए।