सीमा से 80 किमी दूर हाईवे बना सेना का रनवे, NH-911 पर उतरे रुद्र, ध्रुव और चेतक
दंतौर के पास करीब 30 मिनट चला अभ्यास, हाईवे से ही हेलिकॉप्टरों ने भरी उड़ान; आपात स्थिति में वैकल्पिक लैंडिंग स्थल के उपयोग की क्षमता परखी
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चंद्रशेखर
September 30, 2026
समाचार › देश-विशेष
बीकानेर। भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास मंगलवार को भारतीय सेना की एविएशन इकाइयों ने हाईवे लैंडिंग ड्रिल की। दंतौर के पास नेशनल हाईवे-911 (NH-911) के निर्धारित हिस्से को कुछ समय के लिए अस्थायी सैन्य रनवे में तब्दील किया गया। सेना के रुद्र, ध्रुव और चेतक हेलिकॉप्टरों ने हाईवे पर लैंडिंग और टेकऑफ का अभ्यास किया। करीब 30 मिनट चले इस अभ्यास के दौरान हेलिकॉप्टर निर्धारित हिस्से पर उतरे और प्रक्रिया पूरी करने के बाद वहीं से दोबारा उड़ान भरी। रिपोर्टों के अनुसार अभ्यास के दौरान एयरक्रू और जमीन पर मौजूद टीम के बीच समन्वय पर भी विशेष जोर रहा।
दंतौर क्षेत्र भारत-पाक सीमा के नजदीक होने के कारण यह अभ्यास पश्चिमी राजस्थान के रेगिस्तानी और सीमावर्ती वातावरण में किया गया महत्वपूर्ण प्रशिक्षण रहा। इसका उद्देश्य पारंपरिक एयरबेस और निर्धारित हेलीपैड के अलावा उपयुक्त वैकल्पिक स्थानों से हेलिकॉप्टर संचालन की क्षमता को परखना रहा। हाईवे पर लैंडिंग और टेकऑफ के दौरान उड़ान संचालन, जमीन पर मौजूद टीम के साथ समन्वय, सुरक्षा प्रक्रियाओं और परिचालन लचीलेपन का अभ्यास किया गया।
कुछ देर के लिए थमी वाहनों की आवाजाही
सैन्य अभ्यास के दौरान NH-911 के निर्धारित हिस्से पर यातायात को नियंत्रित किया गया। दंतौर से आगे करीब आधे घंटे तक वाहनों की आवाजाही रोकी गई, ताकि हेलिकॉप्टरों की लैंडिंग और टेकऑफ सुरक्षित तरीके से कराया जा सके। अचानक हाईवे पर सैन्य हेलिकॉप्टरों की गतिविधि शुरू होने से आसपास मौजूद लोगों और वाहन चालकों में भी उत्सुकता नजर आई।
हाईवे को वैकल्पिक लैंडिंग स्थल के तौर पर परखने की ड्रिल
सैन्य अभियानों में हेलिकॉप्टरों के लिए सामान्य तौर पर एयरबेस और निर्धारित हेलीपैड का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि आपात परिस्थितियों में यदि नियमित लैंडिंग स्थल उपलब्ध न हो या किसी वैकल्पिक स्थान की जरूरत पड़े, तो उपयुक्त और पूर्व निर्धारित प्रक्रिया के तहत अन्य स्थानों का उपयोग किया जा सकता है। इसी क्षमता को मजबूत करने के लिए हाईवे जैसे वैकल्पिक ऑपरेटिंग क्षेत्र में लैंडिंग और टेकऑफ की प्रक्रिया का अभ्यास किया जाता है।
NH-911 पर हुई ड्रिल में हेलिकॉप्टरों को निर्धारित हिस्से पर सुरक्षित तरीके से उतारने, वहां आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने और फिर उसी स्थान से उड़ान भरने की क्षमता को परखा गया। अलग-अलग श्रेणी के रुद्र, ध्रुव और चेतक हेलिकॉप्टरों की भागीदारी से अभ्यास का दायरा भी व्यापक रहा।
एयर-ग्राउंड कोऑर्डिनेशन पर रहा विशेष जोर
हाईवे पर हेलिकॉप्टर उतारना केवल पायलट की उड़ान क्षमता से जुड़ा अभ्यास नहीं है। इसके लिए जमीन पर मौजूद टीम और हवा में मौजूद एयरक्रू के बीच सटीक तालमेल आवश्यक होता है। लैंडिंग क्षेत्र को सुरक्षित करना, आसपास की गतिविधियों को नियंत्रित करना, हेलिकॉप्टर की लैंडिंग के दौरान आवश्यक संकेत और समन्वय बनाए रखना तथा टेकऑफ से पहले क्षेत्र को सुरक्षित करना—पूरी प्रक्रिया में ग्राउंड टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।
दंतौर में हुई ड्रिल में इसी एयर-ग्राउंड कोऑर्डिनेशन को व्यावहारिक रूप से परखा गया।
रेगिस्तानी और सीमावर्ती क्षेत्र में प्रशिक्षण
पश्चिमी राजस्थान का रेगिस्तानी भूभाग सैन्य संचालन के लिहाज से अलग तरह की परिस्थितियां प्रस्तुत करता है। ऐसे क्षेत्र में लंबी दूरी, शुष्क वातावरण और सीमित पारंपरिक बुनियादी ढांचे के बीच सैन्य संसाधनों की त्वरित आवाजाही महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में वैकल्पिक स्थानों से हेलिकॉप्टर संचालन का प्रशिक्षण परिचालन तैयारियों का हिस्सा है।
दंतौर के पास NH-911 पर हुआ अभ्यास इसी व्यापक तैयारी को दर्शाता है। इसमें हेलिकॉप्टर संचालन के साथ-साथ जमीन पर मौजूद टीम, सुरक्षा व्यवस्था और संचार के बीच समन्वय को भी परखा गया।
सामान्य हाईवे से कुछ देर के लिए बना सैन्य ऑपरेटिंग एरिया
आमतौर पर वाहनों की आवाजाही वाले NH-911 का निर्धारित हिस्सा मंगलवार को कुछ समय के लिए सैन्य विमानन गतिविधि का केंद्र बन गया। रुद्र, ध्रुव और चेतक हेलिकॉप्टरों की लैंडिंग और फिर उसी स्थान से टेकऑफ ने यह दिखाया कि नियंत्रित परिस्थितियों में उपयुक्त वैकल्पिक स्थानों से हेलिकॉप्टर संचालन की प्रक्रियाओं का अभ्यास किया जा सकता है।
अभ्यास पूरा होने के बाद हाईवे को फिर से सामान्य यातायात के लिए खोल दिया गया। करीब 30 मिनट की इस ड्रिल में भारतीय सेना ने वैकल्पिक लैंडिंग क्षमता, एयर-ग्राउंड समन्वय, परिचालन लचीलापन और आपात परिस्थितियों के लिए तैयारी जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं का अभ्यास किया।