लोक परंपराओं को समाज की मुख्यधारा में स्थापित करने का प्रयास है लोकमंथन यात्रा : जसवंत खत्री
‘हम भारत के लोग’ में देश के सभी नागरिकों की सामूहिक शक्ति निहित : सत्यनारायण कुमावत
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वीएसके डेस्क
October 08, 2026
समाचार › राजस्थान विविध
अजमेर, 8 अक्टूबर। लोकमंथन यात्रा का तृतीय चरण गुरुवार को पुष्कर से शुरू हुआ। चित्तौड़ प्रांत में यह यात्रा 8 से 21 अक्टूबर तक चलेगी और झालावाड़ में इसका समापन होगा। यात्रा का उद्देश्य लोक परंपराओं, संस्कृति और विविध सामाजिक सरोकारों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है।
यात्रा की शुरुआत प्रातः 8 बजे ब्रह्मा मंदिर में दर्शन और पुष्करराज जी की पूजा के बाद हुई। इसके बाद वाहन रैली के रूप में यात्रा प्रातः 10 बजे आदर्श विद्या निकेतन, पुष्कर मार्ग होते हुए अजमेर रीजनल कॉलेज तिराहे पर पहुंची, जहां यात्रा का स्वागत किया गया। इसके बाद यात्रा राजकीय कन्या महाविद्यालय पहुंची। यहां विभिन्न सामाजिक संगठनों की ओर से सांस्कृतिक कार्यक्रम और प्रदर्शनियां आयोजित की गईं।
अखिल भारतीय शैक्षिक महासंघ, संस्कार भारती, संस्कृत भारती सहित विभिन्न संगठनों ने भारतीय लोक परंपराओं पर आधारित कार्यक्रम प्रस्तुत किए। इनमें लोक वाद्य, लोक गीत और लोक नृत्य की प्रस्तुतियां हुईं। क्रीड़ा भारती की ओर से सतोलिया, लट्टू, लंगड़ी टांग, रस्सा-कशी, खो-खो और कबड्डी जैसे लोक खेलों का प्रदर्शन किया गया। ‘पधारो म्हारे देश’ लोकगीत की प्रस्तुति ने भी लोगों का मन मोह लिया। कार्यक्रम में कलाकारों का स्वागत किया गया।
इसके बाद लोकमंथन यात्रा माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के सभागार के लिए रवाना हुई। मार्ग में नवीन न्यायालय परिसर के बाहर अधिवक्ताओं ने यात्रा का स्वागत किया। राजीव गांधी सभागार में अधिवक्ता परिषद एवं राजस्थान ह्यूमन रिसोर्सेज डेवलपमेंट फाउंडेशन (RHRD) के संयुक्त तत्वावधान में संगोष्ठी आयोजित की गई। इसमें जयपुर से आए जसवंत खत्री मुख्य वक्ता रहे, जबकि अध्यक्षता जगदीश सिंह राणा ने की।
संगोष्ठी में जसवंत खत्री ने कहा कि लोकमंथन यात्रा लोक परंपराओं को समाज की मुख्यधारा में स्थापित करने का प्रयास है। लोक जीवन से जुड़ी परंपराएं समाज की सांस्कृतिक चेतना का महत्वपूर्ण आधार हैं।
लोकमंथन यात्रा के संयोजक डॉ. सत्यनारायण कुमावत ने कहा कि संविधान में वर्णित ‘हम भारत के लोग’ केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि भारत के सभी नागरिकों की सामूहिक शक्ति का परिचायक है। यात्रा के माध्यम से इसके अर्थ और महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला जा रहा है।
उन्होंने बताया कि राजस्थान के प्रत्येक जिला केंद्र से निकलने वाली लोकमंथन यात्राओं का विभिन्न संगठनों की ओर से स्वागत किया जा रहा है। इस दौरान लोक संस्कृति, परंपरा, शिक्षा, साहित्य, संविधान और खेलों से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
तृतीय चरण में यात्रा 8 अक्टूबर को पुष्करराज से अजयमेरु महानगर होते हुए लल्लाई ग्राम, सरवाड़ के लिए रवाना हुई। सायंकालीन कार्यक्रम के बाद यात्रा जालिया-2, ब्यावर पहुंची।