‘हम भारत के लोग’ पर लोक मंथन: भारतीयता को पश्चिमी नजरिए से नहीं, ‘स्व’ के दृष्टिकोण से समझने की जरूरत
जे. नंदकुमार बोले—लोक केवल परंपरा नहीं, भारत की सांस्कृतिक चेतना का आधार; लोकज्ञान को मुख्यधारा से जोड़ना जरूरी
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चंद्रशेखर
September 23, 2026
समाचार › राजस्थान विविध
जयपुर। भारत को केवल भौगोलिक इकाई के रूप में नहीं, बल्कि हजारों वर्षों से विकसित सांस्कृतिक चेतना के रूप में समझने की जरूरत है। भारतीय संस्कृति रीति-रिवाजों और पर्व-त्योहारों तक सीमित नहीं, बल्कि सत्य, एकात्मता और विश्व-बंधुत्व की जीवन-दृष्टि है। यह बात प्रज्ञा प्रवाह के अखिल भारतीय संयोजक जे. नंदकुमार ने सोमवार को प्रताप नगर स्थित राजकीय महिला पॉलिटेक्निक कॉलेज में आयोजित ‘हम भारत के लोग’ लोक मंथन संगोष्ठी में कही।
संगोष्ठी का आयोजन अधिवक्ता परिषद सांगानेर इकाई एवं आरएचआरडी फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। नंदकुमार ने कहा कि ‘लोक मंथन’ महज परिचर्चा नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन संवाद और शास्त्रार्थ परंपरा का आधुनिक स्वरूप है। इसका उद्देश्य भारत को पश्चिमी या औपनिवेशिक दृष्टि से देखने के बजाय ‘स्व’ यानी भारतीय दृष्टिकोण से समझना है।
लोक में छिपा है भारत का ज्ञान
उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक आत्मा गांवों, जनजातीय समाजों, लोककलाओं, हस्तशिल्प, लोककथाओं और मौखिक परंपराओं में दिखाई देती है। भारतीय चिंतन व्यक्ति और समाज को अलग-अलग नहीं देखता, बल्कि व्यष्टि, समष्टि, सृष्टि और परमेष्ठी के बीच एकात्म संबंध स्थापित करता है।
उन्होंने पर्यावरण संरक्षण का उदाहरण देते हुए कहा कि ‘माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः’ जैसी भारतीय अवधारणाएं प्रकृति को केवल संसाधन नहीं, बल्कि सम्मान और संरक्षण योग्य मानती हैं। इसी प्रकार भारतीय कुटुंब व्यवस्था सामाजिक सुरक्षा और पारिवारिक संबंधों की मजबूत आधारभूमि रही है।
युवाओं को जड़ों से जोड़ने की जरूरत
नंदकुमार ने कहा कि आज युवाओं को अपनी भाषा, इतिहास, दर्शन और परंपराओं से जोड़ना जरूरी है। किसानों, कारीगरों, माताओं और वनांचल समाजों में सुरक्षित लोकज्ञान को विश्वविद्यालयों और मुख्यधारा के विमर्श तक लाने की आवश्यकता है। भारतीय कला, साहित्य, दर्शन और विज्ञान को आधुनिक संदर्भों में प्रस्तुत करना भी जरूरी है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता आरएचआरडी अध्यक्ष एवं जोधपुर प्रांत के प्रांत संघचालक हरदयाल वर्मा ने की। केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर के कुलाधिपति कन्हैयालाल बेरवाल विशिष्ट अतिथि रहे। संचालन डॉ. महेंद्र सिंह धांधू ने किया तथा आभार अधिवक्ता मनमोहन स्वरूप सेन ने जताया।
नंदकुमार ने कहा—‘लोक मंथन’ भारतीयता के पुनर्जागरण का माध्यम
उन्होंने कहा कि अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़कर ही भारत आधुनिक चुनौतियों का सामना करते हुए अपनी सांस्कृतिक अखंडता को मजबूत कर सकता है। भारतीय विचार-दृष्टि में निहित शांति और सह-अस्तित्व के संदेश को विश्व के सामने रखने की आवश्यकता है।