‘हम भारत के लोग’ के संदेश के साथ जयपुर में निकली लोकमंथन यात्रा
5000 से अधिक लोगों की सहभागिता, 3500 से अधिक कॉलेज विद्यार्थियों ने लिया भाग; लोक संस्कृति के रंगों से सजा महारानी कॉलेज
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चंद्रशेखर
September 22, 2026
समाचार › राजस्थान विविध
जयपुर, 21 सितंबर। ‘हम भारत के लोग’ के संदेश के साथ सोमवार को जयपुर में लोकमंथन-2026 के अंतर्गत लोकमंथन यात्रा—जयपुर महानगर निकाली गई। श्री गोविंद देवजी मंदिर में दर्शन के बाद जलेबी चौक से शुरू हुई यात्रा को लोकमंथन-2026 आयोजन समिति की अध्यक्ष एवं राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने यात्रा रथ को रवाना किया। यात्रा में नागरिकों, प्रबुद्धजनों, युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं सहित बड़ी संख्या में लोगों ने सहभागिता की।
यात्रा हवामहल, बड़ी चौपड़ और अल्बर्ट हॉल होते हुए महारानी कॉलेज पहुंची। यहां आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में 5000 से अधिक लोगों की सहभागिता रही, जिसमें 3500 से अधिक महाविद्यालयीन विद्यार्थी शामिल थे। बड़ी संख्या में छात्राओं और युवाओं की भागीदारी ने आयोजन को व्यापक सामाजिक स्वरूप दिया।
शाही लवाजमे से लोक वाद्यों तक दिखी राजस्थान की रंगत
लोकमंथन यात्रा में शाही लवाजमा, लोक वाद्य, पारंपरिक परिधान, अखाड़ों के खिलाड़ी, क्रीड़ा भारती के राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी और विभिन्न लोक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहीं। यात्रा मार्ग में रंगोलियां सजाई गईं। अनेक स्थानों पर व्यापार मंडलों और समाजजनों ने पुष्पवर्षा कर यात्रा का स्वागत किया।
क्रीड़ा भारती के खिलाड़ियों ने चलते मार्ग में साइकिलिंग, स्केटिंग, फुटबॉल, कबड्डी, सतोलिया सहित विभिन्न खेल गतिविधियों का प्रदर्शन किया। यात्रा में करीब 1500 खिलाड़ी और नागरिक सहभागी हुए।
महारानी कॉलेज में एक मंच पर लोक कला, साहित्य और संस्कृति
महारानी कॉलेज परिसर में लोकमंथन के विभिन्न आयामों को अलग-अलग मंचों और प्रदर्शनी स्थलों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। मुख्य सभागार में ‘धरती धोरा री’ नृत्य, चरी नृत्य, मांड गायन, भवई, कच्छी घोड़ी, कठपुतली नृत्य, कालबेलिया नृत्य और मलखम्ब प्रदर्शन सहित अनेक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां हुईं। संस्कृत लोकगीत एवं लोकनृत्य भी प्रस्तुत किए गए।
‘लोक में भारत’ और ‘लोक साहित्य और संस्कृति’ जैसे विषयों पर व्याख्यान हुए। वहीं ‘स्वतंत्रता समर में राजस्थान के लोक नायक’ विषय पर नृत्य नाटिका के माध्यम से राजस्थान के लोक नायकों के योगदान को प्रस्तुत किया गया।
रामदेवजी-तेजाजी की झांकियों ने दिखाई लोक आस्था
लोक आस्था और लोक चेतना को सामने रखने के लिए बाबा रामदेवजी और वीर तेजाजी से संबंधित झांकियां तथा मंदिर परंपरा की प्रस्तुतियां भी आकर्षण का केंद्र रहीं। इनके माध्यम से राजस्थान की लोक आस्था, लोक नायकों और समाज जीवन में उनकी भूमिका को प्रदर्शित किया गया।
लोक से संविधान तक—विचार और संवाद का मंच
कार्यक्रम में लोक जीवन के विभिन्न पक्षों पर संवाद की श्रृंखला भी आयोजित की गई। सेमिनार हॉल में जयपुर की लोक कला एवं संस्कृति पर प्रश्नोत्तरी, ‘लोक परम्पराएं’ विषय पर लोक संवाद तथा ‘हम भारत के लोग—हमारी भाषा हमारी पहचान’ विषय पर गोष्ठी हुई।
खुले मंच पर संस्कृत संभाषण, जादू कला, लोक रंग, लोक कथा, लोक कविता, लोक कहानी और लोक स्मृतियों से जुड़े कार्यक्रम हुए। ‘हम भारत के लोग : संविधान और लोक संस्कृति का समन्वय’ विषय पर परिचर्चा भी आयोजित की गई। इतिहास लेखन की लोक परंपरा और वंशावली वाचन के माध्यम से राजस्थान की मौखिक एवं लोक इतिहास परंपरा को सामने रखा गया।
प्रदर्शनी में दिखी ज्ञान, परंपरा और लोक विज्ञान की झलक
महारानी कॉलेज के प्रदर्शनी क्षेत्र में संत रविदासजी, राजस्थान के वीर-वीरांगनाओं, भारतीय संविधान, गुरुकुल परंपरा, लोक विज्ञान और औषधीय पौधों के वैज्ञानिक महत्व से संबंधित प्रदर्शनियां लगाई गईं। साहित्य केंद्र और स्व-चित्र केंद्र भी बनाए गए।
परंपरागत खेलों के क्षेत्र में कबड्डी, रस्साकशी, महिलाओं के पारंपरिक खेल, तीरंदाजी, थड़ा और साफा प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। वहीं लोक व्यंजन क्षेत्र में राजस्थान की पारंपरिक खाद्य संस्कृति से जुड़े विभिन्न व्यंजनों का प्रदर्शन किया गया।
लोकमंथन यात्रा और महारानी कॉलेज में आयोजित कार्यक्रमों में लोक कला, लोक साहित्य, लोक भाषा, लोक आस्था, लोक इतिहास, पारंपरिक खेल, पर्यावरणीय दृष्टि, संविधान और भारतीय सांस्कृतिक चेतना को एक मंच पर प्रस्तुत किया गया। आयोजन ने ‘हम भारत के लोग’ की भावना के साथ राजस्थान की विविध लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को सामने रखा।