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भारत ने अंतरिक्ष में बढ़ाई AI की ताकत, अब सैटेलाइट खुद करेगा डेटा का विश्लेषण

2028 में अंतरिक्ष में डेटा सेंटर की तैयारी

By वीएसके डेस्क October 02, 2026
समाचार › देश-विशेष
भारत ने अंतरिक्ष में बढ़ाई AI की ताकत, अब सैटेलाइट खुद करेगा डेटा का विश्लेषण
नई दिल्ली। अंतरिक्ष से मिलने वाली तस्वीरों और सूचनाओं के इस्तेमाल के तरीके में भारत ने एक नई तकनीकी क्षमता हासिल की है। हैदराबाद की स्पेसटेक कंपनी टेकमीटूस्पेस का MOI-1A सैटेलाइट अंतरिक्ष में ही तस्वीरों और डेटा का शुरुआती विश्लेषण करने में सक्षम है। यानी हर जानकारी को पहले धरती पर भेजने की जरूरत नहीं होगी। उपग्रह खुद यह पहचान सकेगा कि उसके पास मौजूद डेटा में क्या उपयोगी है और क्या नहीं। यह उपग्रह स्पेसएक्स के ट्रांसपोर्टर-18 मिशन के जरिए अंतरिक्ष में भेजा गया। कंपनी के अनुसार, MOI-1A भारत का पहला ऑर्बिटल कंप्यूटिंग सैटेलाइट है। इस क्षमता के साथ भारत अमेरिका, यूरोपीय संघ और चीन के बाद अंतरिक्ष में इस तरह की तकनीक का इस्तेमाल करने वाला चौथा देश बन गया है।

तस्वीरें भेजने के बजाय वहीं होगा विश्लेषण

पारंपरिक व्यवस्था में सैटेलाइट किसी इलाके की तस्वीरें या बड़ी मात्रा में डेटा इकट्ठा करता है और फिर उसे धरती पर स्थित ग्राउंड स्टेशन तक भेजा जाता है। इसके बाद विशेषज्ञ उस डेटा का विश्लेषण करते हैं। MOI-1A इस प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण बदलाव लाता है। इसमें मौजूद कंप्यूटिंग और AI क्षमता डेटा को अंतरिक्ष में ही प्रोसेस कर सकती है। इससे बड़ी मात्रा में जुटाए गए डेटा में से जरूरी हिस्से की पहचान करके उसे ही धरती तक भेजना संभव होगा। मसलन, यदि किसी क्षेत्र की निगरानी के दौरान सैटेलाइट को करीब 300 जीबी डेटा मिलता है, लेकिन उसमें से केवल 5 जीबी जानकारी उपयोगी है, तो AI सिस्टम उस जरूरी हिस्से को अलग कर सकता है। इससे अनावश्यक डेटा को धरती तक भेजने की जरूरत घट सकती है।

13 किलो का सैटेलाइट, 120 वॉट की कंप्यूटिंग क्षमता

MOI-1A का वजन करीब 13 किलोग्राम है और यह 6U फॉर्म फैक्टर पर आधारित है। इसमें करीब 120 वॉट क्षमता के साथ अंतरिक्ष में डेटा प्रोसेसिंग की व्यवस्था की गई है। इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा उन परिस्थितियों में हो सकता है, जहां बड़ी मात्रा में डेटा तेजी से तैयार होता है और हर सूचना को धरती तक भेजने में समय या बैंडविड्थ की समस्या आती है।

बाढ़ आई तो सैटेलाइट खुद पहचान सकेगा बदलाव

ऑर्बिटल कंप्यूटिंग का इस्तेमाल कई क्षेत्रों में किया जा सकता है। बाढ़ जैसी आपदा के दौरान सैटेलाइट किसी प्रभावित इलाके की तस्वीरें लेकर उनमें पानी के फैलाव से संबंधित पैटर्न पहचान सकता है। इसी तरह जंगलों की निगरानी, फसल की स्थिति, खनन क्षेत्र, भूमि उपयोग और सीमावर्ती इलाकों की निगरानी में भी अंतरिक्ष से मिलने वाले डेटा का तेजी से विश्लेषण किया जा सकता है। इस व्यवस्था में धरती पर मौजूद टीमों को हर तस्वीर या पूरा डेटा प्राप्त होने का इंतजार करने के बजाय पहले से छांटी गई महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।

डेटा ट्रांसफर का खर्च और समय घटाने पर जोर

सैटेलाइट से धरती तक बड़ी मात्रा में डेटा भेजना तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण और महंगा हो सकता है। MOI-1A का उद्देश्य इसी प्रक्रिया में जरूरी डेटा को प्राथमिकता देना है। AI आधारित प्रोसेसिंग के जरिए उपग्रह अनावश्यक या कम उपयोगी जानकारी को अलग कर सकता है और महत्वपूर्ण परिणामों को धरती तक भेज सकता है। इससे भविष्य में रियल टाइम या लगभग रियल टाइम निगरानी से जुड़े मिशनों को फायदा मिलने की संभावना है।

अगला लक्ष्य: अंतरिक्ष में डेटा सेंटर

टेकमीटूस्पेस ने इस तकनीक को आगे बड़े स्तर पर ले जाने की योजना भी बताई है। कंपनी की योजना 2028 तक अंतरिक्ष में डेटा सेंटर विकसित करने की है। इसके लिए अधिक क्षमता वाले करीब 100-100 किलोग्राम वजन के सैटेलाइट भेजने की तैयारी बताई गई है। इनमें बड़ी संख्या में GPU और करीब 100 टेराबाइट स्टोरेज उपलब्ध कराने की योजना है। भविष्य में कई सैटेलाइट को एक नेटवर्क के रूप में जोड़कर अंतरिक्ष में ही बड़े पैमाने पर डेटा प्रोसेसिंग करने की दिशा में काम किया जा सकता है।

अंतरिक्ष से मिलने वाले डेटा के इस्तेमाल का बदल सकता है तरीका

MOI-1A की खासियत केवल यह नहीं है कि वह तस्वीरें ले सकता है, बल्कि यह है कि वह तस्वीरों से जुड़ी जानकारी को अंतरिक्ष में रहते हुए प्रोसेस करने की क्षमता रखता है। इससे सैटेलाइट आधारित निगरानी और डेटा विश्लेषण के पारंपरिक तरीके में बदलाव की संभावना बनती है। आने वाले समय में यदि इस तकनीक को बड़े स्तर पर विकसित किया जाता है, तो आपदा प्रबंधन, पर्यावरण निगरानी, कृषि, संसाधन प्रबंधन और अन्य क्षेत्रों में अंतरिक्ष से मिलने वाली सूचनाओं को ज्यादा तेजी से उपयोग में लाया जा सकेगा।

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