भारतीय से शादी के बाद भी भारत आने का अधिकार नहीं, पाकिस्तानी महिला की याचिका पर केरल HC का फैसला
By
वीएसके डेस्क
October 01, 2026
समाचार › देश-विशेष
कोच्चि: भारतीय नागरिक से शादी करने के बाद भारत आने की उम्मीद कर रही एक पाकिस्तानी महिला को केरल हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली। अदालत ने स्पष्ट किया कि विदेशी नागरिक का भारतीय नागरिक से विवाह अपने आप उसे भारत में प्रवेश या वीजा हासिल करने का अधिकार नहीं देता।
मामला उस दंपती से जुड़ा है, जो फिलहाल भारत से बाहर रह रहा है। पाकिस्तानी मूल की पत्नी अपने पति के परिवार में होने वाले विवाह समारोह में शामिल होने के लिए भारत आना चाहती थी। इसके लिए वीजा प्रक्रिया शुरू कराने को लेकर दंपती ने हाईकोर्ट का रुख किया था।
विदेश में हुई थी दोनों की शादी
याचिका में बताया गया कि महिला ने दुबई में भारतीय नागरिक से विवाह किया था। शादी के बाद दोनों विदेश में रह रहे हैं। भारत में पति के परिवार में एक शादी समारोह होना था, जिसमें शामिल होने के लिए महिला भारत आना चाहती थी।
दंपती का कहना था कि महिला को वीजा के लिए आवेदन करने का अवसर भी नहीं मिल रहा है। उन्होंने अदालत से इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की मांग की।
सिर्फ शादी को आधार बनाकर वीजा नहीं मांगा जा सकता
याचिकाकर्ताओं की ओर से यह दलील भी दी गई कि भारतीय नागरिक की पत्नी होने के कारण महिला को भारत आने के लिए लंबे समय के वीजा पर विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का हवाला देते हुए राहत की मांग की।
हालांकि, केंद्र सरकार ने इसका विरोध किया। सरकार की ओर से कहा गया कि विदेशी नागरिकों के भारत में प्रवेश और उनके यहां रहने का मामला लागू कानूनों और केंद्र की नीतियों के अधीन है। किसी विदेशी नागरिक को केवल वैवाहिक संबंध के आधार पर भारत में प्रवेश का अधिकार नहीं मिल जाता।
पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तानी नागरिकों पर लागू है वीजा संबंधी रोक
सुनवाई के दौरान अदालत के सामने केंद्र सरकार के उस फैसले का भी उल्लेख हुआ, जिसमें पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तानी नागरिकों के लिए वीजा सेवाओं पर रोक लगाई गई थी।
कोर्ट ने पाया कि संबंधित सरकारी आदेश अभी वापस नहीं लिया गया है। ऐसे में मौजूदा नीति के रहते पाकिस्तानी नागरिक के लिए वीजा प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश देने की मांग स्वीकार नहीं की जा सकती।
विदेशी नागरिकों के प्रवेश का फैसला केंद्र के अधिकार क्षेत्र में
जस्टिस बीचू कुरियन थॉमस की पीठ ने कहा कि भारत में किसी विदेशी नागरिक के प्रवेश, उसके रहने और देश से बाहर जाने को नियंत्रित करने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है। यह विषय राष्ट्रीय सुरक्षा, संप्रभुता, देश की अखंडता और सार्वजनिक व्यवस्था से भी जुड़ा हुआ है।
अदालत ने यह भी साफ किया कि भारतीय नागरिक का जीवनसाथी होना किसी विदेशी व्यक्ति को भारत में प्रवेश का स्वतः लागू होने वाला अधिकार नहीं देता।
अनुच्छेद 14 और 21 की दलील पर भी नहीं मिली राहत
दंपती ने संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के तहत अधिकारों का हवाला दिया था। अदालत ने इस आधार पर भी राहत देने से इनकार कर दिया। पीठ ने माना कि संविधान का अनुच्छेद 14 गैर-नागरिकों को भी कुछ परिस्थितियों में संरक्षण देता है, लेकिन विदेश में मौजूद किसी विदेशी नागरिक के लिए यह प्रावधान भारत में प्रवेश का स्वतः अधिकार पैदा नहीं करता।
इन परिस्थितियों को देखते हुए केरल हाईकोर्ट ने पाकिस्तानी महिला और उसके भारतीय पति की याचिका खारिज कर दी।