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शिक्षक का लक्ष्य केवल नौकरी नहीं, राष्ट्र निर्माण हो: विक्रांत खंडेलवाल

एसएसजी पारीक कॉलेज में ‘आरोहण’ समारोह, पत्रिका ‘पीयूष’ का विमोचन और डांडिया महोत्सव ‘डांडिया धूम’ आयोजित

By वीएसके डेस्क October 17, 2026
समाचार › राजस्थान विविध
शिक्षक का लक्ष्य केवल नौकरी नहीं, राष्ट्र निर्माण हो: विक्रांत खंडेलवाल
जयपुर। भारत विकास परिषद के राष्ट्रीय संगठन मंत्री विक्रांत खंडेलवाल ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल आजीविका कमाना नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के लिए योग्य और संस्कारवान पीढ़ी तैयार करना है। प्रत्येक शिक्षण संस्थान में प्रतिमाह व्याख्यानमाला आयोजित की जानी चाहिए, जिसमें समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले लोगों को विद्यार्थियों के बीच अपने अनुभव साझा करने के लिए आमंत्रित किया जाए। इससे विद्यार्थियों को प्रेरणा मिलेगी और उनमें राष्ट्रहित में कार्य करने की भावना विकसित होगी। खंडेलवाल शनिवार को एसएसजी पारीक पीजी कॉलेज ऑफ एजुकेशन, जयपुर में नवागंतुक विद्यार्थियों के स्वागत समारोह ‘आरोहण’, पुरस्कार वितरण, महाविद्यालय की पत्रिका ‘पीयूष’ के विमोचन और डांडिया महोत्सव ‘डांडिया धूम’ को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सामाजिकता, कुटुंबिता, शिक्षा, पर्यावरण और नागरिक कर्तव्यों जैसे विषयों पर प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में पंच-सूत्रों का पालन करना चाहिए।

संस्कार और अनुशासन से बनेगा व्यक्तित्व

समारोह में अति विशिष्ट अतिथि राज्यपाल के ओएसडी डॉ. कुलदीप मिश्रा ने कहा कि विद्यार्थी जीवन व्यक्तित्व निर्माण का महत्वपूर्ण चरण है। इस दौरान अर्जित ज्ञान, नैतिक मूल्य और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना ही भविष्य में योग्य नागरिक और संवेदनशील शिक्षक बनने का आधार तैयार करती है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी प्रतिभा पहचानकर उसका उपयोग समाजहित में करने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री के ओएसडी गोविंद पारीक ने कहा कि शिक्षा व्यक्ति और समाज के विकास का सशक्त माध्यम है। शिक्षक समाज के भविष्य का निर्माण करते हैं, इसलिए भावी शिक्षकों में ज्ञान के साथ संवेदनशीलता, नैतिकता, कर्तव्यनिष्ठा और नेतृत्व क्षमता भी आवश्यक है।
संस्कार और अनुशासन से बनेगा व्यक्तित्व

मानवीय मूल्यों के साथ हो सर्वांगीण विकास

एसएसजी पारीक कॉलेज एवं शब्द शिक्षण संस्था के सचिव लक्ष्मीकांत पारीक ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ रचनात्मक और सांस्कृतिक गतिविधियां विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, सहयोग, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक समरसता विकसित करती हैं। विद्यार्थियों को शैक्षणिक उपलब्धियों के साथ मानवीय मूल्यों को भी प्राथमिकता देनी चाहिए। महाविद्यालय की प्राचार्य प्रोफेसर डॉ. प्रमिला दुबे ने नवागंतुक विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए कहा कि ‘आरोहण’ नई शुरुआत और उज्ज्वल भविष्य की ओर बढ़ने का प्रतीक है। भावी शिक्षक राष्ट्र की आने वाली पीढ़ी के निर्माता हैं। इसलिए उनमें विषयगत दक्षता के साथ संवेदनशीलता, नवाचार और मानवीय दृष्टिकोण का होना आवश्यक है। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन और सरस्वती वंदना से हुआ। इस अवसर पर महाविद्यालय की पत्रिका ‘पीयूष’ का विमोचन किया गया तथा विभिन्न गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। संस्था अध्यक्ष बजरंग लाल पारीक, उपाध्यक्ष नंदकिशोर पारीक और कोषाध्यक्ष बुद्धि प्रकाश पारीक सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे। समारोह के अंतिम चरण में आयोजित डांडिया महोत्सव ‘डांडिया धूम’ में विद्यार्थियों ने पारंपरिक वेशभूषा में उत्साहपूर्वक भाग लिया।
मानवीय मूल्यों के साथ हो सर्वांगीण विकास

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