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आयुर्वेद के 6 दुर्लभ ग्रंथों की तलाश, आयुष मंत्रालय ने कॉलेज-लाइब्रेरियों से मांगी जानकारी

By चंद्रशेखर April 30, 2026
समाचार › देश-विशेष
आयुष मंत्रालय ने आयुर्वेद के 6 प्राचीन और दुर्लभ ग्रंथों की उपलब्धता का देशव्यापी सर्वे शुरू किया है। इसके लिए आयुर्वेद कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और पुस्तकालयों को पत्र भेजकर 15 दिन में विस्तृत जानकारी मांगी है। मंत्रालय की अंडर सेक्रेटरी शीला टिर्की की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि कुछ पारंपरिक आयुर्वेद ग्रंथ वर्तमान में उपलब्ध नहीं हैं या सीमित रूप में मिल रहे हैं। संस्थानों से इन ग्रंथों के संबंध में सटीक जानकारी मांगी गई है। आयुष मेडिकल एसोसिएशन के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. राकेश पाण्डेय ने बताया कि आयुर्वेद में नए ग्रंथों के समावेश से आयुर्वेद के यूजी-पीजी छात्रों की पढ़ाई को मजबूती मिलेगी, साथ ही रिसर्च को लेकर भी नई दिशा तय होगी। मंत्रालय ने 6 ग्रंथों में विशेष तौर आयुर्वेद कल्पद्रुम, आयुर्वेद रत्नाकर, योगरत्न संग्रह, द्रव्यगुण निघंटु, सर्वयोग चिकित्सा रत्नम और कूपीपक्व रसायनम की उपलब्धता का सत्यापन शुरू किया है। देशभर में 550 से अधिक आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज और उनके पुस्तकालय इस प्रक्रिया का हिस्सा होंगे। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यदि ये ग्रंथ अधिनियम की अनुसूची में शामिल नहीं हैं तो उन्हें जोड़े जाने पर भी विचार किया जाएगा। मंत्रालय ने ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 की अनुसूची-1 में संशोधन की प्रक्रिया के तहत यह पहल की है। पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण और औषधियों के दुरुपयोग पर नियंत्रण की दिशा में भी यह कदम अहम साबित होगा।

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