ब्रिटेन के प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थान में लगी 'सर्जरी के पितामह' महर्षि सुश्रुत की भव्य प्रतिमा
युवाओं के लिए स्कॉलरशिप का भी ऐलान
By
वीएसके डेस्क
June 23, 2026
समाचार › देश-विशेष
प्लास्टिक सर्जरी के जनक और 'सर्जरी के पितामह' माने जाने वाले महर्षि सुश्रुत की 90 किलोग्राम वजनी कांसे (ब्रॉन्ज) की प्रतिमा का यूनाइटेड किंगडम (UK) में अनावरण किया गया है। शुक्रवार को दुनिया के सबसे पुराने और सबसे बड़े सर्जिकल संस्थान 'रॉयल कॉलेज ऑफ सर्जन्स ऑफ एडिनबर्ग' के 'प्लेफेयर ऑडिटोरियम' में इसे स्थापित किया गया।
इस कॉलेज की स्थापना 1505 में हुई थी और 140 से अधिक देशों में इसके 33,000 से ज्यादा सदस्य हैं।
यह अनावरण भारत की प्राचीन चिकित्सा विरासत और ‘सुश्रुत संहिता’ को वैश्विक स्तर पर मान्यता दिलाने की दिशा में अहम पहल कहा जा रहा है।
यह इवेंट UK में रहने वाले तेलुगु मूल के सर्जन प्रोफेसर चंद्र चेरुवु की अगुवाई में आयोजित किया गया था। उनकी कोशिशों की वजह से दुनिया भर में अब महर्षि सुश्रुत को ‘सर्जरी के जनक’ के तौर पर जाना जाता है। इस प्रतिमा को प्रोफेसर चेरुवू और उनके परिवार द्वारा बनाए गए 'चेरुवू फैमिली फाउंडेशन' ने दान किया है. इसे तमिलनाडु के तिरुवनंतमामलाई के एक मूर्तिकार ने तैयार किया है।
कार्यक्रम के दौरान ‘चेरुवु फैमिली लीगेस ग्रांट’ ने ट्रैवलिंग सर्जिकल स्कॉलरशिप की भी घोषणा की। इसका मकसद युवा सर्जनों को वैश्विक स्तर पर उनकी पहचान बनाने में मदद करना और उनकी क्षमता को निखारना है।
मूर्ति के अनावरण के मौके पर प्रोफेसर चेरुवु ने स्वलिखित ‘महर्षि सुश्रुत: ए कम्पेंडियम – फादर ऑफ़ सर्जरी’ नाम की साक्ष्य पर आधारित किताब को रिलीज किया। मूर्ति और किताब दोनों को स्वीकार करके, रॉयल कॉलेज ऑफ़ सर्जन्स ऑफ एडिनबर्ग ने एक तरह से मान्यता दे दी कि महर्षि सुश्रुत ही सच में ‘सर्जरी के फादर’ हैं।