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गौहत्या पर लगी रोक तो बिफरी तमिलनाडु की विजय सरकार।

सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

By चंद्रशेखर July 02, 2026
समाचार › देश-विशेष
गौहत्या पर लगी रोक तो बिफरी तमिलनाडु की विजय सरकार।
तमिलनाडु सरकार ने मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें राज्यभर में 1976 के सरकारी आदेश को लागू करते हुए गौहत्या पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया था। पशुपालन विभाग के सचिव की ओर से दायर विशेष अनुमति याचिका (SLP) फिलहाल सुप्रीम कोर्ट की डिफेक्ट लिस्ट में है और अभी इस पर सुनवाई की तारीख तय नहीं हुई है। तमिलनाडु सरकार ने अपनी याचिका में 27 मई को मद्रास हाईकोर्ट की ओर से दिए गए आदेश को चुनौती दी है। हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को निर्देश दिया था कि राज्य में बकरीद के दौरान या किसी भी अन्य दिन कहीं भी गाय या बछड़े की हत्या न होने दिया जाए। राज्य सरकार का कहना है कि हाई कोर्ट के निर्देश तमिलनाडु में जानवरों की हत्या को नियंत्रित करने वाले वैधानिक प्रावधानों से आगे बढ़कर दिए गए हैं।

जानें सरकार ने दलील में क्या कहा?

सरकार ने अपनी याचिका में पशुओं के प्रति क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960, पशु क्रूरता निवारण (स्लॉटर हाउस) नियम, 2001, तमिलनाडु शहरी स्थानीय निकाय अधिनियम, 1998 और तमिलनाडु शहरी स्थानीय निकाय नियम, 2023 का भी हवाला दिया है। एसएलपी में कहा गया है कि मूल जनहित याचिका में केवल यह मांग की गई थी कि पशुओं की हत्या केवल अधिकृत बूचड़खानों में ही कराया जाए, लेकिन मद्रास हाईकोर्ट ने इससे आगे बढ़ते हुए पूरे तमिलनाडु में गाय और बछड़ों की हत्या पर पूर्ण रोक लगाने का आदेश दे दिया। यह आदेश अवकाशकालीन पीठ के जिस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन और जस्टिस वी. लक्ष्मीनारायणन ने इंदु मक्कल काची के युवा विंग सचिव के. सूर्य प्रसांत द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया था। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि बकरीद के दौरान कोयंबटूर में गोहत्या के लिए अस्थायी शेड बनाए गए थे. इसके बाद उन्होंने सार्वजनिक स्थानों पर गायों की हत्या को रोकने के निर्देश देने की मांग की थी। हाई कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 48 का हवाला देते हुए कहा था कि राज्य का दायित्व है कि वह गायों, बछड़ों और अन्य दुग्ध और भारवाही पशुओं। की हत्या पर रोक लगाने के लिए आवश्यक कदम उठाए कोर्ट ने 1976 के उस सरकारी आदेश का भी जिक्र किया, जिसमें तमिलनाडु के बूचड़खानों में गायों और बछियों की हत्या पर प्रतिबंध लगाया गया था। हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार की ओर से जारी यह आदेश कानून के समान प्रभाव रखता है और इसे लागू किया जाना चाहिए।

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