गोविन्द गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय, बांसवाड़ा में आयोजित होगी वागड़ ज्ञान सभा
वागड़ की ज्ञान परंपरा से विकसित भारत की ओर : 4 जुलाई को होगा वैचारिक महाकुंभ
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चंद्रशेखर
June 05, 2026
समाचार › राजस्थान विविध
बांसवाड़ा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन, विकसित भारत@2047 के संकल्प तथा भारतीय ज्ञान परम्परा की समकालीन प्रासंगिकता पर गंभीर एवं व्यापक विमर्श के उद्देश्य से गोविन्द गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय, बांसवाड़ा में आगामी 4 जुलाई को “वागड़ ज्ञान सभा” का आयोजन किया जाएगा।विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. केशव सिंह ठाकुर की परिकल्पना एवं मार्गदर्शन में आयोजित यह ज्ञान सभा वागड़ अंचल के बौद्धिक जीवन में एक महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ने जा रही है। इसमें बांसवाड़ा, डूंगरपुर और प्रतापगढ़ जिलों के उच्च शिक्षा संस्थानों से जुड़े शिक्षक, शिक्षाविद्, शोधार्थी तथा अकादमिक विशेषज्ञ सहभागिता करेंगे।
ज्ञान सभा का मूल उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति को केवल एक शासकीय दस्तावेज के रूप में नहीं, बल्कि भारतीय समाज की आवश्यकताओं, सांस्कृतिक विरासत और स्थानीय ज्ञान परंपराओं से जुड़े एक जीवंत शैक्षिक दर्शन के रूप में समझना और उसे व्यवहार में उतारने के मार्ग तलाशना है। आज जब भारत वर्ष विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में अग्रसर है, तब यह आवश्यक हो जाता है कि शिक्षा केवल डिग्री प्रदान करने की व्यवस्था न रहकर राष्ट्र निर्माण, सामाजिक चेतना, सांस्कृतिक आत्मविश्वास और नवाचार का आधार बने।
इसी दृष्टि से यह आयोजन शिक्षकों और शिक्षा विशेषज्ञों के बीच सार्थक संवाद का मंच प्रदान करेगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में निहित भारतीय भाषाओं के संवर्धन, मातृभाषा आधारित शिक्षा तथा त्रिभाषा सूत्र की भावना पर भी विशेष मंथन किया जाएगा। ज्ञान सभा में इस बात पर विचार होगा कि मातृभाषा, भारतीय भाषाओं और वैश्विक संपर्क की भाषाओं के मध्य संतुलन स्थापित करते हुए विद्यार्थियों में भाषाई दक्षता, सांस्कृतिक चेतना तथा ज्ञान अर्जन की क्षमता को किस प्रकार सुदृढ़ किया जा सकता है। शिक्षा नीति का यह दृष्टिकोण भारत की भाषाई विविधता को राष्ट्रीय शक्ति में परिवर्तित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
वागड़ क्षेत्र अपनी जनजातीय संस्कृति, लोकज्ञान, प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व की जीवन शैली, लोककला, लोक चिकित्सा तथा सामुदायिक जीवन मूल्यों के लिए विशेष पहचान रखता है। ज्ञान सभा में इस स्थानीय ज्ञान-संपदा को भारतीय ज्ञान परम्परा के व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखने और उसे आधुनिक शिक्षा एवं अनुसंधान से जोड़ने पर विशेष विचार किया जाएगा। आयोजन का उद्देश्य यह भी है कि नई पीढ़ी अपने सांस्कृतिक मूलों से जुड़ते हुए वैश्विक ज्ञान समाज की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हो सके।
विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि विकसित भारत का स्वप्न तभी साकार होगा जब शिक्षा में भारतीयता, नवाचार, अनुसंधान, कौशल, सामाजिक उत्तरदायित्व और स्थानीय अनुभवों का समुचित समावेश हो। ज्ञान सभा में भारतीय ज्ञान परम्परा, पंचकोषीय शिक्षा, मूल्यपरक शिक्षण, स्थानीय से वैश्विक ज्ञान की यात्रा, अनुसंधान संस्कृति, नवाचार तथा आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में शिक्षा की भूमिका जैसे विषयों पर भी विचार-विमर्श होगा। प्राप्त सुझावों को भविष्य की शैक्षिक एवं अनुसंधान गतिविधियों में उपयोगी आधार के रूप में विकसित किया जाएगा।
कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए गठित समिति में प्रो. राजेश जोशी को संयोजक नियुक्त किया गया है। प्रो. नरेंद्र पानेरी , डॉ. राकेश डामोर, डॉ. लोकेन्द्र कुमार तथा डॉ. अर्पित पाठक सह-संयोजक के रूप में दायित्व निभाएंगे। समिति के सलाहकार सदस्यों में वित्त नियंत्रक उदय सिंह , प्रो. प्रमोद वैष्णव, प्रो. शफकत राणा, लेखराम भास्कर, चिराग त्रिवेदी, शुभम पंडया को शामिल किया गया है।