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स्व-बोध के विचार के साथ समाज को देशहित के लिए सक्रिय होना होगा – डॉ. मोहन भागवत

By चंद्रशेखर June 06, 2026
समाचार › देश-विशेष
स्व-बोध के विचार के साथ समाज को देशहित के लिए सक्रिय होना होगा – डॉ. मोहन भागवत
रेशिमबाग मैदान में आयोजित कार्यकर्ता विकास वर्ग – द्वितीय के समापन समारोह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि आने वाला युग भारत का है, यह विश्व मान रहा है। लेकिन, हमें उस दिशा के लिए तैयार तथा सुसज्जित रहना होगा। इसके लिए पूरे समाज को स्व-बोध विचार को ध्यान में रखते हुए देशहित के लिए सक्रिय होना होगा। स्व-बोध के आधार पर, स्वार्थ और मतभेदों को छोड़कर समाज तथा विश्व के लिए कार्य करने वाला देश निर्माण करना आवश्यक है। अगर ऐसा होता है, तो स्वामी विवेकानंद के सपनों का भारत अगले दो से तीन दशकों में निश्चित ही बनेगा। कार्यकर्ता विकास वर्ग – द्वितीय के समापन समारोह में मंच पर प्रमुख अतिथि प्रसिद्ध उद्योगपति पद्मभूषण कुमार मंगलम बिरला, प्रांत संघचालक दीपक तामशेट्टीवार, महानगर संघचालक राजेश लोया और वर्ग सर्वाधिकारी महेंद्र सिंह मग्गो उपस्थित रहे। सरसंघचालक जी ने कहा कि व्यक्ति नकारात्मक बातें जल्दी देखता है। वह इस बात पर ध्यान देता है कि संकट की परिस्थिति है, लेकिन वह यह नहीं सोचता कि हमारे पास भी कुछ है। स्थिति कैसी भी हो, जिन्हें अपने शक्ति पर विश्वास होता है, वे आसानी से उसका सामना कर सकते हैं। एक समय था, जब भारत विश्वगुरू था। लेकिन हमने अपनी तैयारी और सुसज्जता को खो दिया था, और इस वजह से हमें एक हजार साल की गुलामी झेलनी पड़ी। अभी केवल भारत ही विश्व को नया मार्ग दिखा सकता है। भारत का समय आ गया है, हमें इसके लिए तैयार रहना होगा। नया मार्ग देते समय दूसरे लोगों की नकल करने से काम नहीं चलेगा। अपने विचारों के आधार पर नया मार्ग निर्माण करना होगा। उसके लिए स्व-बोध के स्पष्ट विचार रखने वाले व्यक्ति आवश्यक हैं। ऐसा वातावरण बनाने वाले व्यक्तियों का समूह बनाने के लिए संघ कार्य कर रहा है। संघ को केवल देश के लिए कार्य करना है। समाज की संगठित शक्ति से ही देश का उत्थान होगा। विश्व उन्हीं की सुनेगा, जिनके पास शक्ति है दुनिया में स्वार्थ के संघर्ष से दूसरे देश प्रभावित हो रहे हैं। ईरान-अमेरिका में युद्ध चल रहा है और हमारे देश में तेल के दाम बढ़ रहे हैं। जिन देशों के पास शक्ति है, वे किसी पर भी बम गिरा रहे हैं। देश पर कब्ज़ा करने की कोशिश कर रहे हैं या तेल बंद कर रहे हैं। जिनके पास शक्ति नहीं है, वे सिर झुकाकर चुप हैं। दुनिया उन्हीं की सुनती है, जिनके पास शक्ति है। जब भारत शक्तिशाली बनेगा, तो विश्व हमारी सुनेगा और विश्व को नई प्रणाली देखने को मिलेगी। हमारा देश धर्मप्राण है, भारत विश्व को धर्म देने के लिए बड़ा होगा। सरसंघचालक ने कहा कि भारत आगे न बढ़े, ऐसा सोच कर कुछ प्रवृत्तियां देश में फूट डाल रही हैं। देश को पीछे ले जाने के लिए परेशानियां खड़ी कर रहे हैं। छोटे-छोटे बहाने बनाकर सामाजिक जीवन में अशांति पैदा करने के प्रयत्न किए जा रहै हैं। अगर देश के संस्कार बढ़ेंगे तो हमें नुकसान होगा, यह सोच कर कुछ लोग हमारे संस्कारों की भावना को प्रभावित करने का प्रयत्न कर रहे हैं।
स्व-बोध के विचार के साथ समाज को देशहित के लिए सक्रिय होना होगा – डॉ. मोहन भागवत

अमृतकाल के समय में भारत का होगा पुनर्निर्माण - कुमार मंगलम बिरला जी

कुमार मंगलम बिरला जी ने कहा कि मुझे सरसंघचालक जी से कई बार मिलने का मौका मिला है और मैं उनकी सादगी तथा राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पण से प्रभावित हूं। उनके विचारों की स्पष्टता, ध्येय में दृढ़ता और देश की सेवा के प्रति निष्ठा अद्भुत है। उन्होंने कुछ दिन पहले मुझसे कहा था कि संघ को समझने के लिए अंदर आकर देखना होगा और अनुभव लेना होगा। संघ के स्वयंसेवक प्राकृतिक और दूसरे संकटों में समाज और देश के साथ खड़े रहते हैं। इसी भावना से संघ सौ साल के पड़ाव पर पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि सदियों की गुलामी के कारण देश का आत्मविश्वास खत्म हो गया था और आज भारत की अर्थव्यवस्था विश्व की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। यह चुनौतियों का समय है, लेकिन यह भारत का भी युग है। देश आत्मनिर्भरता के जरिए अपना भविष्य बना सकता है। आत्मनिर्भरता सिर्फ़ एक आर्थिक नीति नहीं है, अपितु राष्ट्र निर्माण का आधार है। देश उद्योगों के ज़रिए आगे बढ़ सकता है और कंपनियों को बड़े राष्ट्रीय लक्ष्य को ध्यान में रखकर काम करना चाहिए। देश के युवाओं को उद्यमिता की ओर बढ़ना चाहिए। उन्हें भारत में रहकर वैश्विक उत्पादन बनाने चाहिए। यह भारत का दौर है और राष्ट्र निर्माण का यह सही समय है। अमृतकाल के समय में भारत का पुनर्निर्माण होगा, ऐसी आशा कुमार मंगलम बिरला जी ने व्यक्त की।
अमृतकाल के समय में भारत का होगा पुनर्निर्माण - कुमार मंगलम बिरला जी

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