Breaking News
VSK Foundation Jaipur Logo - विश्व संवाद केंद्र जयपुर
विश्व संवाद केंद्र, जयपुर ( VSK Foundation Jaipur )

विविधता प्राकृतिक है और एकता ही सत्य है :डॉ. मोहन भागवत

भौतिक भिन्नताओं के बावजूद हम एक-दूसरे के हैं

By वीएसके डेस्क August 31, 2026
समाचार › देश-विशेष
विविधता प्राकृतिक है और एकता ही सत्य है :डॉ. मोहन भागवत
न्यूयॉर्क, अमेरिका: अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित मैडिसन स्क्वायर गार्डन में 29 अगस्त को अमेरिकन हिंदूज़ फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग (एहेड फोरम) द्वारा आयोजित “यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन” को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने अपने मुख्य संबोधन में कहा कि जब हम अमेरिका, अर्थात् यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका, की बात करते हैं, तो एक शब्द की प्रायः चर्चा होती है—“प्लूरलिज़्म” (बहुलतावाद)। वहीं, जब हम भारत की बात करते हैं, तो एक दूसरा शब्द अथवा वाक्यांश सामने आता है—“यूनिटी इन डायवर्सिटी” (विविधता में एकता)। उन्होंने कहा कि भारत के लिए एकता और विविधता, दोनों उसके डीएनए में हैं। डॉ. मोहन भागवत ने कहा, “राष्ट्र केवल भौगोलिक इकाइयाँ नहीं होते। इस ब्रह्मांड की संरचना में राष्ट्रों को एक दायित्व निभाना होता है।” भारत की विश्व-दृष्टि की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि हर राष्ट्र की एक नियति होती है, जिसे उसे पूरा करना होता है। भारत को जो नियति मिली है, वह है विविधता में एकता के सत्य को साकार करना और समय-समय पर पूरी दुनिया को भी इस एकत्व का बोध कराना। उन्होंने कहा, “हम एक हैं और विविधता के कारण हमारी वह एकता और भी सुसज्जित होती है। इसलिए विविधता का उत्सव मनाया जाना चाहिए, उसका सम्मान किया जाना चाहिए और उसे स्वीकार किया जाना चाहिए। साथ ही, हमें इस एकत्व की भावना को ध्यान में रखना चाहिए।” उन्होंने आगे कहा कि राष्ट्र केवल भौगोलिक सीमाओं से नहीं बनते। स्वामी विवेकानंद के शब्दों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रत्येक राष्ट्र के पास विश्व को देने के लिए एक संदेश, पूरा करने के लिए एक मिशन और प्राप्त करने के लिए एक नियति होती है। डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि विश्व में दो प्रवृत्तियाँ हैं। एक प्रवृत्ति कहती है—“जियो और जीने दो।” दूसरी प्रवृत्ति कहती है—“जियो और केवल उन्हें जीने दो, जो हमारी बात मानें।” उन्होंने कहा, “जो लोग कहते हैं, ‘यदि आप हमारी बात मानेंगे, तो हम आपकी रक्षा करेंगे’। रक्षा को संस्कृत और हिंदी में ‘रक्षण’ कहा जाता है। इसलिए जो केवल उनकी रक्षा करते हैं, जो उनकी बात मानते हैं, वे राक्षस हैं।” इसके विपरीत, उन्होंने ऐसी दृष्टि की बात कही जिसमें यह महत्व नहीं रखता कि कोई व्यक्ति आपकी बात मानता है या नहीं, आपकी बात सुनता है या नहीं, आपके बारे में क्या सोचता है अथवा आपके लिए कितना उपयोगी है। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी बात यह है कि हम सभी मनुष्य हैं। हमें जीवन को बनाए रखना है और इसलिए हमें बंधुत्व के साथ रहना है। आपसी अपनत्व की भावना पर जोर देते हुए पूजनीय सरसंघचालक जी ने कहा, “भौतिक भिन्नताओं और हर प्रकार की विविधता के उपरांत हमारे भीतर कुछ ऐसा है, जो समान है। हम एक-दूसरे के हैं।” उन्होंने आगे कहा कि वह सिद्धांत, जो सबको जोड़ता है, सबको आत्मसात करता है, किसी प्रकार का विभाजन उत्पन्न नहीं करता, सभी के बीच संतुलन बनाए रखता है और मध्य मार्ग दिखाता है, वही धर्म है।
विविधता प्राकृतिक है और एकता ही सत्य है :डॉ. मोहन भागवत

पर्यावरण के प्रति अपने दायित्व का बोध

पर्यावरण की रक्षा के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का उल्लेख करते हुए डॉ. मोहन भागवत ने कहा, “हम आजकल फादर्स डे, मदर्स डे आदि क्यों मनाते हैं? क्योंकि हम उनके प्रति अपने दायित्व को याद करते हैं। हमें पर्यावरण के प्रति अपने दायित्व को भी याद रखना चाहिए।” उन्होंने कहा, “आपके खाने से पहले दुनिया में कृषि होनी चाहिए। इसीलिए आप खा सकते हैं। यदि किसान खेती करना बंद कर दें, तो आप क्या खाएँगे?” उन्होंने आगे कहा, “आप अपने कपड़े इसलिए पहन रहे हैं क्योंकि मिलें हैं, श्रमिक काम कर रहे हैं और कपास उगाने वाले किसान अभी भी हैं।” उन्होंने कहा कि “हम हर चीज के लिए किसी न किसी के ऋणी हैं। इसलिए हमें वापस देने की आवश्यकता है।”

भारत का वैश्विक मिशन और उसकी नियति

भारत की वैश्विक भूमिका को रेखांकित करते हुए डॉ. मोहन भागवत ने कहा, “मानव जीवन इस ज्ञान को सभी तक पहुँचाने और स्वयं उस ज्ञान को जीने के लिए मिला है—अपने मोक्ष के लिए और दुनिया के बेहतर भविष्य के लिए। यही वह मिशन है, जिसे भारत को पूरा करना है। यही वह संदेश है, जिसे विश्व भर के भारतीयों को उपदेश देकर नहीं, बल्कि अपने आचरण और उदाहरण से देना है। यही भारत की नियति है।” विश्व भर में रहने वाले भारतीय प्रवासियों की भूमिका पर उन्होंने कहा कि उन्हें अपनी कर्मभूमि के प्रति निष्ठावान रहना चाहिए, लेकिन जन्मभूमि के मूल्यों के अनुरूप सतत जीवन जीना चाहिए। उन्होंने कहा कि यही भारत की उनसे अपेक्षा है। डॉ. मोहन भागवत ने कहा, “हम एकत्व से जुड़े हैं और विविधता से सुसज्जित हैं। विविधता प्राकृतिक है और एकता ही सत्य है। हम एकत्व की सजावट के रूप में विविधता का उत्सव मनाते हैं।”

रक्षाबंधन का संदेश—दायित्व और बंधन

मुख्य संबोधन की शुरुआत में प्रतिष्ठित वक्ताओं की उपस्थिति में रक्षाबंधन मनाया गया। इस विषय पर बोलते हुए डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि दूसरों के प्रति दायित्व को स्वीकार करना व्यक्ति को मुक्ति की ओर ले जाता है। रक्षाबंधन में निहित बंधन का संदेश भी यही है।

२०० धार्मिक नेताओं का ‘कॉल फॉर एक्शन’ प्रस्ताव

सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत के संबोधन से पहले उन्होंने २०० धार्मिक नेताओं के ‘कॉल फॉर एक्शन’ प्रस्ताव को प्रस्तुत किया। इस अवसर पर ३० देशों के १८० धार्मिक नेताओं ने भविष्य के प्रति दायित्व स्वीकार करने के लिए पाँच सूत्रीय कार्य योजना की घोषणा की। “वन वर्ल्ड वन ह्यूमैनिटी” (एक विश्व, एक मानवता) नामक इस ‘कॉल फॉर एक्शन’ (कार्य आह्वान) प्रस्ताव में यह संकल्प लिया गया कि किसी भी समुदाय की गरिमा यदि अपमान अथवा हिंसा के संकट में हो, तो उसकी गरिमा की रक्षा के लिए सामूहिक रूप से खड़ा हुआ जाएगा। वैश्विक धार्मिक नेताओं ने धर्म के उपयोग के माध्यम से घृणा, अपमान, अमानवीयकरण अथवा हिंसा को उचित ठहराने को अस्वीकार किया। मुख्य वक्ताओं के संबोधन से पहले रक्षाबंधन मनाया गया, जिसमें सभी ने एक-दूसरे को राखी बाँधकर एकत्व की भावना का संदेश दिया। इस आयोजन को सफल बनाने के लिए २५० संगठन एक साथ आए। इस वननेस सेलिब्रेशन (एकत्व उत्सव ) में अमेरिका के ३९ राज्यों और ८५० अमेरिकी नगरों से लगभग ६,००० प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसके अतिरिक्त २९ देशों से भी प्रतिनिधियों ने इसमें सहभागिता की।

Related Articles

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय समन्वय बैठक सम्पन्न

राष्ट्र, समाज और भविष्य की चुनौतियों पर तीन दिनों तक व्यापक चिंतन-मंथन

Aug 21, 2026

जनगणना-2027 में 40 बिंदुओं पर जुटाई जाएगी जानकारी

धर्म से लेकर आधार, वोटर आईडी और पासपोर्ट तक होंगे सवाल

Aug 19, 2026

अखिल भारतीय समन्वय बैठक में डेमोग्राफिक चेंज को लेकर होगी चर्चा

Join RSS के माध्यम से पंजीकरण में जुलाई 2025 के मुकाबले जुलाई 2026 में ढाई गुना से अधिक की वृद्धि; आवेदन करने वाले 65 प्रतिशत 30 वर्ष से कम आयु वाले

Aug 18, 2026

वर्ल्ड हिंदू कांग्रेस 2026: मुंबई में 18 से 20 दिसंबर तक होगा वैश्विक महासम्मेलन

‘समानं व्रतं सह चित्तम्’ होगा सम्मेलन का केंद्रीय विषय; पिरामल ग्रुप के चेयरमैन अजय पिरामल अध्यक्ष नियुक्त

Aug 16, 2026