सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने नागपुर व सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कोलकाता संघ कार्यालय में किया ध्वजारोहण
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वीएसके डेस्क
August 16, 2026
समाचार › देश-विशेष
नागपुर/कोलकाता। आज 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने नागपुर स्थित महाल संघ कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में ध्वजारोहण किया। वहीं, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने संघ कार्यालय, ‘केशव भवन’ (मानिकतला) कोलकाता में आयोजित कार्यक्रम में ध्वजारोहण किया।
स्वतंत्रता दिवस समारोह में सरसंघचालक ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस हम सबके लिए गौरव का और उत्सव का विषय़ है। 1857 से गिनेंगे तो लगातार 90 वर्ष अनेक प्रकार का त्याग बलिदान देकर हमारे पूर्वजों ने स्वातंत्र्य की प्राप्ति की। उस त्याग और बलिदान का गौरव हमारे मन में है। लेकिन इसके साथ एक भान मन में चाहिए, कि इतना त्याग-परिश्रम करके स्वतंत्रता हमको मिली है, उस स्वतंत्रता को कायम रखना और जैसा सावरकर जी ने कहा है - "जे जे उत्तम, उदात्त, उन्नत, महन्मधुर ते ते। स्वतंत्रते भगवती, सर्व तव सहचारी होते" -- तो स्वतंत्रता का परिणाम जो-जो उत्तम, उदात्त, उन्नत, महन्मधुर है, वह सब कुछ हमारे देश में अवतीर्ण हो। इसकी आवश्यकता पूर्ण करने का दायित्व भी हमारा बनता है।
अपना राष्ट्र स्वतंत्र तो हो गया और स्वतंत्र रहेगा। यह बात पक्की है। परंतु उस राष्ट्र को सुखी, संपन्न, सुरक्षित बनाना है। विश्व में अपना नियत योगदान करने वाला राष्ट्र बनाना है तो बहुत सारी आपत्तियां, बहुत सारे उल्टे चलने वाले लोग अपने रास्ते में हैं। हमारे तत्व से अलग ना होते हुए संपूर्ण दुनिया में इन सारी बातों का सामना करके हमको भारत को एक विश्वगुरु राष्ट्र बनाना है। संपूर्ण मानवता के जीवन में अपना सार्थक योगदान करने वाला देश बनाना है। ये कर्तव्य हमारे सामने आज है। इसका हम चिंतन करें और आज का संदेश लेकर यहां से हम लोग जाएं।
कोलकाता में आयोजित समारोह में सरकार्यवाह ने स्वतंत्रता दिवस की इस पुण्य प्रभात में भारत को विश्वगुरु बनाने का संकल्प लेने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस हमारे लिए बहुत पवित्रता, स्वाभिमान और प्रेरणा देने वाला दिवस है। भारत एक अमर, शाश्वत एवं गौरवशाली राष्ट्र है। कई शताब्दियों की पराधीनता के बाद हमें आज़ादी मिली। बंगाल सहित संपूर्ण भारत के अनेकों स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने प्राणों की आहुति दी है।
भारत की अखंडता और एकात्मता को अक्षुण्ण रखना, भारत के प्रत्येक व्यक्ति के जीवन के पूर्ण विकास के लिए अपने प्रयत्न, परिश्रम और योगदान देना, और विश्व के सामने एक श्रेष्ठ राष्ट्र के नाते भारत को खड़ा करने के लिए हर प्रकार से प्रयत्न करना—यह आज के भारतीयों का दायित्व है।
पिछले कुछ समय से भारत ने विश्व पटल पर नाम रोशन किया है। हम धीरे-धीरे एक सशक्त राष्ट्र के रूप में जीवन के हर क्षेत्र में न केवल आगे बढ़ रहे हैं, बल्कि विश्व के सामने उदाहरण प्रस्तुत करने की क्षमता भी रखते हैं। इसलिए भारत के लोगों को 'वसुधैव कुटुंबकम्' के मनोभाव से, अपने स्वातंत्र्य को अन्य देशों के लिए एक आदर्श, एक उदाहरण और उनके समर्थन व सहयोग की मिसाल बनाना चाहिए।
हम सब एक ही भारत माता की संतान हैं। आज के दिन आजादी की भूमिका को ठीक से समझने की जरूरत है, हमारे स्वतंत्रता आंदोलन में बलिदान देने वाले देशभक्तों को याद करना और भारत को संगठित, सामाजिक व आर्थिक रूप से बेहतर बनाने के लिए संकल्पित होना आवश्यक है।