विद्या भारती की अखिल भारतीय कार्यकारिणी बैठक शुरू, शिक्षा में भारतीय दृष्टि और राष्ट्रभाव पर जोर
विद्या भारती की अखिल भारतीय कार्यकारिणी बैठक शुरू, शिक्षा में भारतीय दृष्टि और राष्ट्रभाव पर जोर
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वीएसके डेस्क
September 11, 2026
समाचार › देश-विशेष
जबलपुर। विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान की अखिल भारतीय कार्यकारिणी बैठक का शुभारंभ शुक्रवार को संस्कारधानी जबलपुर स्थित सरस्वती शिक्षा परिषद कार्यालय के श्री रोशनलाल सक्सेना सभागार में दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। बैठक में देश के सभी प्रांतों से करीब 200 प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। बैठक 13 सितंबर की शाम तक चलेगी।
उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता नृसिंह पीठाधीश्वर पूज्य स्वामी नृसिंह देवाचार्य महाराज ने की। मुख्य अतिथि मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति दिनेश कुमार पालीवाल रहे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल, विद्या भारती के अखिल भारतीय अध्यक्ष डॉ. रविन्द्र कान्हेरे, अखिल भारतीय संगठन मंत्री गोविन्द चन्द्र महंत और अखिल भारतीय महामंत्री देशराज शर्मा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत में विद्या भारती के अखिल भारतीय महामंत्री देशराज शर्मा ने दिवंगत प्रतिष्ठित नागरिकों तथा असम और नेपाल में आई बाढ़ में असमय काल-कवलित हुए नागरिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
1952 से शुरू हुआ कार्य अब 75 वर्ष की ओर
बैठक की प्रस्तावना रखते हुए अखिल भारतीय संगठन मंत्री गोविन्द चन्द्र महंत ने कहा कि विद्या भारती का कार्य 1952 में प्रारंभ हुआ था और अब यह 75 वर्ष की ओर बढ़ रहा है। संस्था का लक्ष्य हिन्दुत्वनिष्ठ और राष्ट्रभक्ति से युक्त शिक्षा के माध्यम से व्यक्ति निर्माण करना है। देश की शिक्षा व्यवस्था में परिवर्तन लाने का जो प्रयास प्रारंभ हुआ था, वह निरंतर आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि विद्या भारती का शिक्षा मॉडल देश के प्रत्येक प्रदेश तक पहुंचा है। इसकी निरंतर समीक्षा करते हुए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की दिशा में आगे बढ़ना बैठक का प्रमुख उद्देश्य है। बैठक में शिक्षा से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।
‘विद्या भारती ने देश के सामने शिक्षा का प्रतिमान रखा’
मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति दिनेश कुमार पालीवाल ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के ‘कर्मण्येवाधिकारस्ते’ के संदेश के भाव से विद्या भारती के कार्यकर्ता राष्ट्र के लिए कार्य कर रहे हैं। वे राष्ट्र के चरित्र निर्माण का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद अपेक्षा थी कि भारत केंद्रित शिक्षा व्यवस्था के माध्यम से देश विश्वगुरु बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा, लेकिन मैकाले और मार्क्स के अनुयायियों ने ऐसी शिक्षा को आगे बढ़ाया, जो देश के लिए अनुपयोगी थी। विद्या भारती ने देश के लिए उपयोगी शिक्षा को अपनाकर समाज के सामने एक प्रतिमान स्थापित किया है।
उन्होंने कहा कि सौभाग्य से राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से भारत केंद्रित शिक्षा का मॉडल देश के सामने आया है और इसमें विद्या भारती का प्रयास प्रशंसनीय है।
‘व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण का कार्य कर रही विद्या भारती’
अध्यक्षीय उद्बोधन में स्वामी नृसिंह देवाचार्य महाराज ने कहा कि विद्या भारती नाम अपने आप में गौरव लिए हुए है। विवेक, सम्यक कर्म, सम्यक ज्ञान और सम्यक भक्ति के समन्वय से संस्था व्यक्ति निर्माण के माध्यम से राष्ट्र निर्माण का कार्य कर रही है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा का लक्ष्य सनातन संस्कृति को आगे बढ़ाना और अपनी धर्म-संस्कृति के प्रति गौरव का भाव पैदा करना होना चाहिए। राष्ट्र का निर्माण सभी के प्रयासों से होगा। वर्तमान शिक्षा नीति राष्ट्र निर्माण में सहायक होगी। विद्या भारती शिक्षा में संस्कार और राष्ट्रभाव का समावेश करने का कार्य कर रही है।
कार्यक्रम के प्रारंभ में सरस्वती शिक्षा परिषद, जबलपुर के सचिव सुधीर अग्रवाल एवं सर्व व्यवस्था प्रमुख नितिन चौधरी ने अतिथियों का स्वागत किया। सत्र का संचालन क्षेत्रीय अध्यक्ष, मध्य क्षेत्र, विवेक शेण्डेय ने किया।