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विभाजन की त्रासदी से वर्तमान चुनौतियों तक का स्मरण जरूरी: बाबूलाल

‘और देश बंट गया’ नाटिका ने जगाई विभाजन की पीड़ा, संगोष्ठी में अखंड भारत, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्र प्रथम की भावना पर हुआ मंथन

By चंद्रशेखर August 14, 2026
समाचार › संघ व विविध संगठन
विभाजन की त्रासदी से वर्तमान चुनौतियों तक का स्मरण जरूरी: बाबूलाल
जयपुर। भारत विभाजन की विभीषिका को स्मरण करते हुए अखिल भारतीय साहित्य परिषद्, जयपुर की ओर से ‘भारत विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के अवसर पर पाथेय भवन स्थित श्री नारद सभागार में संगोष्ठी एवं नाट्य प्रस्तुति का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विख्यात लेखक एवं विचारक होनगासंद्र वेंकटरमय्या शेषाद्रि की प्रसिद्ध ऐतिहासिक कृति ‘और देश बंट गया’ पर आधारित नाटिका का मंचन किया गया। परिषद् के प्रदेश संयुक्त महामंत्री डॉ. ओम प्रकाश भार्गव ने बताया कि आगामी लोकमंथन समारोह की कड़ी में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रदेशभर से बड़ी संख्या में लेखक, शिक्षाविद् एवं पत्रकार उपस्थित रहे। संगोष्ठी के मुख्य वक्ता जयपुर प्रांत प्रचारक बाबूलाल ने अखंड भारत की परिकल्पना से अपने उद्बोधन की शुरुआत करते हुए कहा कि भारत विभाजन की त्रासदी ऐतिहासिक रूप से वर्ष 1947 में हुई, लेकिन विभाजन का प्रभाव आज भी विभिन्न रूपों में दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि समाज और राष्ट्र के सामने उपस्थित वर्तमान चुनौतियों को समझने के लिए विभाजन के इतिहास और उसकी पृष्ठभूमि को जानना आवश्यक है। उन्होंने विभाजन से पूर्व की परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए उस दौर में पाकिस्तान में हिंदू महिलाओं, बच्चों और आम नागरिकों के साथ हुए अत्याचारों तथा बड़े पैमाने पर हुए विस्थापन और हिंसा की घटनाओं का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि विभाजन की पीड़ा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और उसके ऐतिहासिक पक्षों पर गंभीर विमर्श की आवश्यकता है। बाबूलाल ने कहा कि भारत के विभाजन के पीछे तत्कालीन राजनीतिक परिस्थितियों और विभिन्न संगठनों की भूमिका को इतिहास के व्यापक संदर्भ में समझने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि विभाजन के बाद भी उसके दुष्परिणामों से समाज पूरी तरह मुक्त नहीं हो पाया। उन्होंने भारत में घटती हिंदू जनसंख्या दर पर भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जनसांख्यिकीय परिवर्तन भविष्य की सामाजिक एवं सांस्कृतिक संरचना को प्रभावित कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को अपनी विरासत, जीवन-मूल्यों और सांस्कृतिक चेतना से जोड़ना समय की आवश्यकता है। उन्होंने युवाओं से राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने का आह्वान करते हुए कहा कि राष्ट्र की एकता और सामाजिक समरसता को मजबूत करने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने स्तर पर सकारात्मक भूमिका निभानी होगी। उन्होंने कहा कि हमें अपने आसपास हो रहे सामाजिक विभाजनों और चुनौतियों को समझते हुए समाज को जोड़ने के प्रयास करने चाहिए।

‘और देश बंट गया’ ने दर्शकों को किया भावुक

कार्यक्रम में दिल्ली के अदिति महाविद्यालय की छात्राओं ने ‘और देश बंट गया’ नाटिका का प्रभावी मंचन किया। प्रस्तुति के माध्यम से भारत विभाजन के दौरान आम जनमानस की पीड़ा, विस्थापन और त्रासदी के मार्मिक प्रसंगों को मंच पर जीवंत किया गया। प्रस्तुति ने सभागार में उपस्थित दर्शकों को भावुक कर दिया और छात्राओं के अभिनय को सराहना मिली। संगोष्ठी में परिषद् के प्रदेश महामंत्री विष्णु शर्मा हरिहर ने अपने बीज वक्तव्य में कहा कि अखिल भारतीय साहित्य परिषद् अपनी स्थापना से ही साहित्य के क्षेत्र में निरंतर नवाचार को अपनाती रही है। उन्होंने परिषद् द्वारा हाल ही में गठित लोक साहित्य, युवा साहित्य एवं बाल साहित्य प्रकोष्ठों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनके माध्यम से युगानुकूल राष्ट्रीय चेतना से ओतप्रोत साहित्य के लेखन, संरक्षण और संवर्धन की दिशा में कार्य किया जा रहा है। कार्यक्रम के स्वागताध्यक्ष राधा गोविंद करोल ने सभी अतिथियों एवं उपस्थितजनों का आभार व्यक्त किया।

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