युवाओं में राष्ट्रभाव, चरित्र और कर्तव्यबोध से होगा भारत का पुनरुत्थान : डॉ. मनमोहन वैद्य
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वीएसके डेस्क
August 04, 2026
समाचार › संघ व विविध संगठन
अजमेर, 4 अगस्त। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों की श्रृंखला में मंगलवार को मेडिकल कॉलेज सभागार, अजमेर में युवा चिकित्सकों के लिए संवाद कार्यक्रम "राष्ट्र के पुनरुत्थान में युवाओं की भूमिका" आयोजित किया गया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य डॉ. मनमोहन वैद्य ने विषय प्रस्तुति देते हुए युवाओं की भूमिका, भारत की सांस्कृतिक पहचान, कर्तव्यबोध एवं राष्ट्र निर्माण पर विस्तार से विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। अध्यक्षता जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अनिल सामरिया ने की। इस अवसर पर संघ के विभाग संघचालक मुकेश अग्रवाल तथा महानगर संघचालक खाजूलाल चौहान भी उपस्थित रहे।
अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. अनिल सामरिया ने कहा कि विश्व की सबसे बड़ी युवा शक्ति आज भारत के पास है। यदि इस युवा शक्ति को सही दिशा, संस्कार और उचित मार्गदर्शन मिले तो भारत को विश्वगुरु बनने से कोई नहीं रोक सकता। उन्होंने कहा कि राष्ट्र का उत्थान केवल आर्थिक प्रगति और तकनीकी विकास से नहीं, बल्कि युवाओं के उज्ज्वल चरित्र, कर्तव्यबोध, राष्ट्रभक्ति, सेवा भावना और नवाचार से होता है। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वे रोजगार तलाशने वाले नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाले बनें तथा समाज की समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करते हुए राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं।
मुख्य वक्ता डॉ. मनमोहन वैद्य ने कहा कि विश्व के अनेक देशों में लोकतांत्रिक व्यवस्था होने के बावजूद वहां के नागरिक अपनी राष्ट्रीय पहचान, इतिहास और पूर्वजों के विषय में स्पष्ट दृष्टि रखते हैं। उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक पहचान उसके 'भारत' नाम में निहित है। उन्होंने पड़ोसी देश म्यांमार का उदाहरण देते हुए कहा कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद उसने औपनिवेशिक नाम 'बर्मा' छोड़कर अपनी सांस्कृतिक पहचान को पुनः स्थापित किया।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन में स्वराज, स्वाधीनता, स्वतंत्रता और स्वदेशी जैसे विचारों का आधार भारत का अध्यात्म था, जिसने समाज को एक सूत्र में बांधने का कार्य किया। उन्होंने कहा कि यही अध्यात्म स्वतंत्रता संग्राम की प्रेरणा बना और राष्ट्र को एकजुट करने की शक्ति बना।
डॉ. वैद्य ने वंदे मातरम् के ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख करते हुए बताया कि वर्ष 1905 में अंग्रेजों द्वारा बंगाल विभाजन के विरोध में संपूर्ण बंगाल में वंदे मातरम् का उद्घोष हुआ। उस समय हिंदू और मुसलमान दोनों समुदायों ने एकजुट होकर बंग-भंग का विरोध किया तथा 16 अक्टूबर 1905 को रक्षाबंधन के माध्यम से सामाजिक एकता का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों ने सार्वजनिक रूप से वंदे मातरम् के गायन पर प्रतिबंध लगा दिया था, किंतु जनआंदोलन के दबाव में वर्ष 1911 में उन्हें बंगाल विभाजन का प्रस्ताव वापस लेना पड़ा। इसके बाद वंदे मातरम् स्वतंत्रता आंदोलन और क्रांतिकारियों का प्रेरक उद्घोष बन गया।
उन्होंने कहा कि आज समाज में अधिकारों की चर्चा अधिक होती है, जबकि कर्तव्यों के प्रति जागरूकता अपेक्षाकृत कम है। संघ शताब्दी वर्ष में पंच परिवर्तन के माध्यम से समाज परिवर्तन का लक्ष्य लेकर कार्य कर रहा है। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि वे अपने अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों का भी पालन करें। यातायात नियमों का पालन, स्वच्छता बनाए रखना, जल एवं विद्युत की बचत करना तथा कचरे का उचित स्थान पर निस्तारण जैसे छोटे-छोटे नागरिक दायित्व भी राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम के अंत में अजमेर महानगर संघचालक खाजूलाल चौहान ने उपस्थित चिकित्सकों, विद्यार्थियों एवं अतिथियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. विजयपाल ने किया।