पाकिस्तान सीमा पर बढ़ गई हलचल,18,500 बंकरों की तैयारी ने खींचा ध्यान
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वीएसके डेस्क
September 12, 2026
समाचार › देश-विशेष
जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती क्षेत्रों में नागरिक सुरक्षा को लेकर एक बार फिर बंकर निर्माण का मुद्दा चर्चा में आ गया है। पाकिस्तान की ओर से नियंत्रण रेखा (एलओसी) और अंतरराष्ट्रीय सीमा (आईबी) के निकट होने वाली गोलाबारी से सीमावर्ती परिवारों को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत व्यक्तिगत एवं सामुदायिक बंकरों की योजना के क्रियान्वयन को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। भाजपा ने जम्मू-कश्मीर की उमर अब्दुल्ला सरकार पर केंद्र द्वारा स्वीकृत व्यक्तिगत बंकरों के निर्माण में कथित देरी का आरोप लगाया है।
यह मुद्दा ऐसे समय में सामने आया है, जब क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति और सीमावर्ती आबादी की तैयारियों पर लगातार ध्यान दिया जा रहा है। भाजपा के जम्मू-कश्मीर विधानसभा में विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने पुंछ और राजौरी में आयोजित ‘जन संवाद’ कार्यक्रम के दौरान सरकार पर सीमावर्ती लोगों की सुरक्षा संबंधी मांगों को पर्याप्त गति से लागू नहीं करने का आरोप लगाया।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद तीन प्रमुख मांगें
भाजपा नेता के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर के बाद सीमावर्ती जिलों के दौरे के दौरान स्थानीय लोगों ने मुख्य रूप से तीन मांगें रखी थीं—मुआवजा, रोजगार और व्यक्तिगत बंकर। सुनील शर्मा ने कहा कि उन्होंने इन मांगों को केंद्रीय गृह मंत्री के समक्ष भी उठाया था।
उनके अनुसार, केंद्र सरकार की ओर से मुआवजे और रोजगार से संबंधित कदम उठाए गए तथा कुछ लोगों को नियुक्ति पत्र भी दिए गए, लेकिन व्यक्तिगत बंकरों के निर्माण की मांग अभी भी महत्वपूर्ण बनी हुई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सीमावर्ती इलाकों में पहले से सामुदायिक बंकर बनाए गए हैं, लेकिन कई परिवारों की मांग अपने घरों के निकट व्यक्तिगत बंकर की रही है।
14,460 बंकरों की मूल योजना
जम्मू संभाग के सीमावर्ती जिलों में नागरिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने पहले 14,460 बंकरों को मंजूरी दी थी। यह योजना मुख्य रूप से जम्मू, कठुआ, सांबा, पुंछ और राजौरी जिलों में नियंत्रण रेखा तथा अंतरराष्ट्रीय सीमा के निकट रहने वाली आबादी को ध्यान में रखकर तैयार की गई थी।
इनमें 13,029 व्यक्तिगत बंकर और 1,431 सामुदायिक बंकर शामिल हैं। योजना पर लगभग 415.73 करोड़ रुपये की लागत निर्धारित की गई थी।
बाद में अधिक जोखिम वाले क्षेत्रों में अतिरिक्त आबादी को सुरक्षा कवच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से करीब 4,000 और बंकरों को मंजूरी दिए जाने की बात सामने आई। इस प्रकार सीमावर्ती क्षेत्रों में प्रस्तावित एवं स्वीकृत बंकरों की कुल संख्या लगभग 18,500 तक पहुंचती है।
पुंछ-राजौरी में सबसे अधिक संवेदनशीलता
नियंत्रण रेखा से सटे पुंछ और राजौरी जिले लंबे समय से सीमा पार से होने वाली गोलाबारी के लिहाज से संवेदनशील रहे हैं। उपलब्ध योजना के अनुसार इन दोनों जिलों में लगभग 7,298 बंकर बनाए जाने हैं।
वहीं अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे जम्मू, कठुआ और सांबा जिलों में लगभग 7,162 बंकरों का प्रावधान किया गया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य संघर्ष की स्थिति में ग्रामीण आबादी को तत्काल सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराना है।
सीमावर्ती गांवों में रहने वाले परिवारों के लिए बंकर केवल निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि संकट की स्थिति में जीवन रक्षा का महत्वपूर्ण साधन हैं। सीमा पार से गोलाबारी होने पर कुछ ही मिनटों में सुरक्षित स्थान तक पहुंचना जरूरी होता है। ऐसे में घरों के समीप व्यक्तिगत बंकर होने से परिवारों को तत्काल सुरक्षा मिल सकती है।
व्यक्तिगत और सामुदायिक बंकर में अंतर
सरकारी योजना के तहत दो प्रमुख प्रकार के बंकर बनाए जा रहे हैं।
व्यक्तिगत बंकर: लगभग 160 वर्ग फुट क्षेत्रफल वाले बंकर में करीब आठ लोगों के सुरक्षित रहने की क्षमता बताई गई है। इन्हें मुख्य रूप से व्यक्तिगत परिवारों के लिए बनाया जाता है।
सामुदायिक बंकर: लगभग 800 वर्ग फुट क्षेत्रफल वाले सामुदायिक बंकर में करीब 40 लोगों को आश्रय देने की क्षमता है। इनका उपयोग एक साथ कई परिवारों द्वारा किया जा सकता है।
इन बंकरों का निर्माण इस तरह किया जाता है कि गोलाबारी के दौरान नागरिकों को खुले क्षेत्र की तुलना में बेहतर सुरक्षा मिल सके।
बंकरों में जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था
सीमावर्ती क्षेत्रों में बनाए जा रहे इन बंकरों में आपात स्थिति को ध्यान में रखते हुए आवश्यक सामग्री रखने पर भी जोर दिया जा रहा है। कई स्थानों पर कंबल, बिस्तर और अन्य जरूरी सामान उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।
इसका उद्देश्य केवल बंकर का निर्माण करना नहीं, बल्कि संकट की स्थिति में परिवारों को कुछ समय तक वहां सुरक्षित रहने योग्य परिस्थितियां उपलब्ध कराना है।
‘मोदी बंकर’ नाम से भी पहचान
सीमावर्ती क्षेत्रों में बनाए गए इन नागरिक सुरक्षा बंकरों को स्थानीय स्तर पर कई जगह ‘मोदी बंकर’ भी कहा जाता है। यह कोई आधिकारिक संवैधानिक या प्रशासनिक नाम नहीं, बल्कि आम बोलचाल में इस्तेमाल होने वाला शब्द है।
इन बंकरों का मूल उद्देश्य सीमावर्ती नागरिकों को पाकिस्तान की ओर से होने वाली गोलाबारी के दौरान सुरक्षित आश्रय प्रदान करना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूसरे कार्यकाल के दौरान जम्मू संभाग के सीमावर्ती क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर व्यक्तिगत एवं सामुदायिक बंकरों के निर्माण को गति मिली थी।
सीमा सुरक्षा के साथ नागरिक सुरक्षा भी महत्वपूर्ण
जम्मू-कश्मीर में सीमा सुरक्षा की रणनीति केवल अग्रिम चौकियों और सुरक्षा बलों तक सीमित नहीं है। सीमावर्ती गांवों में रहने वाली आबादी भी सुरक्षा व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी है। स्थानीय नागरिक सीमा पर सुरक्षा बलों के लिए आंख और कान का काम करते हैं तथा कठिन परिस्थितियों में अपने गांवों में डटे रहते हैं।
इसलिए सीमावर्ती आबादी को सुरक्षित आवास, बंकर, सड़क, संचार, चिकित्सा और आपातकालीन सुविधाएं उपलब्ध कराना राष्ट्रीय सुरक्षा के व्यापक ढांचे का हिस्सा है।
विशेषकर पुंछ, राजौरी, सांबा, कठुआ और जम्मू के सीमावर्ती इलाकों में पिछले वर्षों में संघर्षविराम उल्लंघन और गोलाबारी की घटनाओं ने नागरिक सुरक्षा के लिए स्थायी ढांचे की आवश्यकता को रेखांकित किया है।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच निगाहें क्रियान्वयन पर
बंकर निर्माण को लेकर भाजपा और जम्मू-कश्मीर सरकार के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए हैं। विपक्ष का आरोप है कि केंद्र से स्वीकृत परियोजनाओं को जमीनी स्तर पर अपेक्षित गति नहीं मिल रही है। वहीं इस पूरे विषय का वास्तविक महत्व राजनीतिक विवाद से अधिक सीमावर्ती परिवारों की सुरक्षा से जुड़ा है।
स्थानीय लोगों की प्राथमिकता यह है कि स्वीकृत बंकर समयबद्ध तरीके से बनें, उनकी गुणवत्ता मानकों के अनुरूप हो और उनमें आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध रहें। साथ ही पुराने या क्षतिग्रस्त बंकरों का रखरखाव भी नियमित रूप से किया जाए।