गौशालाओं को 12 महीने अनुदान की मांग पर जयपुर में हुंकार, 50 हजार गोभक्तों के जुटने का दावा
जयपुर में आज गौ अधिकार हुंकार महासभा; चारे-पानी की व्यवस्था, बकाया भुगतान और गोचर भूमि से जुड़े मुद्दों पर सरकार का ध्यान खींचेंगे गौशाला संचालक
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वीएसके डेस्क
October 09, 2026
समाचार › राजस्थान विविध
जयपुर। राजस्थान में गौशालाओं की आर्थिक और प्रशासनिक समस्याओं तथा गोवंश संरक्षण से जुड़े मुद्दों को लेकर आज, 9 अक्टूबर को जयपुर के सांगानेर स्थित श्री पिंजरापोल गौशाला में ‘गौ अधिकार हुंकार महासभा’ आयोजित की जानी है। राजस्थान गो सेवा समिति के तत्वावधान में होने वाले इस आयोजन में प्रदेशभर के गौशाला संचालकों, संत-महात्माओं, गोपालकों और गोभक्तों के शामिल होने की संभावना है।आयोजकों ने करीब 50 हजार लोगों के जुटने का दावा किया है। प्रदेश की लगभग 4,500 गौशालाओं को आमंत्रित किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। महासभा का मुख्य उद्देश्य गौशालाओं की लंबे समय से चली आ रही समस्याओं को एक मंच पर उठाना और उनके समाधान के लिए सरकार तथा संबंधित विभागों का ध्यान आकर्षित करना है। आयोजन से पहले सांगानेर की गौशाला में भूमि पूजन और गोमाता पूजन भी किया गया। धार्मिक कार्यक्रम में 33 कोटि देवी-देवताओं का आह्वान कर आयोजन की सफलता की प्रार्थना की गई।
नौ महीने के बजाय पूरे साल अनुदान देने की मांग
महासभा में सबसे महत्वपूर्ण मांग गौशालाओं को मिलने वाली सहायता राशि की अवधि नौ महीने से बढ़ाकर पूरे 12 महीने करने की है। गौशाला संचालकों का कहना है कि गोवंश के लिए चारे, पानी और देखभाल की व्यवस्था सालभर करनी पड़ती है। ऐसे में अनुदान की अवधि बढ़ाने के साथ उसका भुगतान भी समय पर होना जरूरी है।
राजस्थान गो सेवा समिति से जुड़े पदाधिकारियों के अनुसार, चारे की बढ़ती कीमतों से गौशालाओं पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। यदि सहायता राशि समय पर उपलब्ध हो, तो गौशालाएं जरूरत के अनुसार चारा खरीदने और गोवंश की देखभाल करने की बेहतर व्यवस्था कर सकती हैं।
बकाया अनुदान और भुगतान संबंधी तकनीकी समस्याएं भी मुद्दा
गौशालाओं की ओर से केवल सहायता राशि बढ़ाने की मांग ही नहीं की जा रही, बल्कि भुगतान में देरी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं से जुड़ी परेशानियों का समाधान भी मांगा जा रहा है। महासभा में इलेक्ट्रॉनिक क्लियरिंग सिस्टम (ECS) से जुड़ी समस्याओं का स्थायी समाधान करने तथा लंबित अनुदान का समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करने की मांग उठने की उम्मीद है।
समिति ने गौशालाओं के रिकॉर्ड और सरकारी प्रक्रियाओं से जुड़ी समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया है। इनमें टैगिंग, ऑनलाइन डेटा और मैपिंग में होने वाली त्रुटियों का समाधान शामिल है, ताकि तकनीकी या रिकॉर्ड संबंधी कमियों का अनावश्यक बोझ गौशाला संचालकों पर न पड़े।
ऑडिट रिकवरी और गोचर भूमि का सवाल
गौशालाओं से जुड़ी ऑडिट रिकवरी का मुद्दा भी इस महासभा के प्रमुख विषयों में शामिल है। समिति की ओर से प्रस्तावित ऑडिट रिकवरी की समीक्षा और संबंधित मामलों में राहत की मांग उठाई गई है।
इसके अलावा गोचर भूमि का सीमांकन, भूमि पर अतिक्रमण हटाना, जरूरत के अनुसार गौशालाओं को भूमि उपलब्ध कराना और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था करना भी महत्वपूर्ण मांगों में शामिल है। इन मुद्दों का सीधा संबंध गौशालाओं के संचालन और गोवंश के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराने से है।
संत-महात्माओं की मौजूदगी में उठेंगे गौ संरक्षण के मुद्दे
आयोजन में द्वारिका पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती महाराज और मलूक पीठाधीश्वर राजेंद्रदास देवाचार्य महाराज सहित संत-महात्माओं के शामिल होने की जानकारी प्रकाशित हुई है। आयोजकों को उम्मीद है कि प्रदेशभर से गौशाला संचालकों और गोभक्तों की भागीदारी से उनकी मांगों को व्यापक समर्थन मिलेगा।
सरकार के फैसले पर टिकी गौशाला संचालकों की उम्मीदें
गौ अधिकार हुंकार महासभा के जरिए गौशाला संचालक सहायता राशि की अवधि बढ़ाने, समय पर भुगतान, चारे-पानी की व्यवस्था और प्रशासनिक समस्याओं के समाधान की मांग को प्रमुखता से सामने रखना चाहते हैं। अब इन मांगों पर सरकार और संबंधित विभागों की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं, यह महत्वपूर्ण होगा।
गौशालाओं का कहना है कि गोवंश संरक्षण के लिए केवल घोषणाएं पर्याप्त नहीं हैं; नियमित आर्थिक सहायता, पारदर्शी प्रक्रिया और जमीनी स्तर पर सुविधाओं की उपलब्धता भी जरूरी है। महासभा का महत्व इसी बात में है कि इन मुद्दों पर सरकार का ध्यान आकर्षित कर उनके व्यावहारिक समाधान की दिशा में पहल हो सके।