डिजिटल ब्लैकमेलिंग और जबरन धर्म परिवर्तन का घिनौना खेल: सलाखों के पीछे ही रहेगा आरोपी जुनैद, हाईकोर्ट का सख्त रुख
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वीएसके डेस्क
October 13, 2026
समाचार › राजस्थान विविध
विशेष रिपोर्ट (जयपुर):
प्यार का झांसा, फिर डिजिटल जासूसी और आखिर में जबरन धर्म परिवर्तन के लिए ब्लैकमेलिंग का एक ऐसा ही सनसनीखेज मामला इन दिनों राजस्थान की न्यायिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। जोधपुर के रहने वाले आरोपी मोहम्मद जुनैद अली के खिलाफ कानून का शिकंजा और कस गया है। अपनी हरकतों से एक युवती की जिंदगी नर्क बनाने वाले इस आरोपी की तीसरी जमानत याचिका को भी राजस्थान हाईकोर्ट ने सिरे से खारिज कर दिया है। अदालत के इस कड़े रुख से साफ है कि डिजिटल अपराध और सामाजिक ताने-बाने को बिगाड़ने वाले गंभीर मामलों में कानून किसी भी तरह की ढील देने के मूड में नहीं है।
क्या है पूरा मामला? (तथ्यों की कड़वी हकीकत)
यह पूरी साजिश तब बेनकाब हुई जब पीड़िता ने जयपुर के महेश नगर थाने में न्याय की गुहार लगाई। पुलिस रिकॉर्ड और केंद्रीय कारागार में बंद जुनैद अली के खिलाफ दर्ज FIR के मुताबिक, आरोपी ने न सिर्फ एक हिंदू युवती पर जबरन धर्म परिवर्तन (मजहब बदलने) का भारी दबाव बनाया, बल्कि इसके लिए उसने बेहद शातिर और आधुनिक तरीका चुना।
1. मोबाइल चोरी और फेक आईडी का जाल: आरोपी जुनैद ने चालाकी से पीड़िता का मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले लिया। इसके बाद उसने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की धज्जियां उड़ाते हुए सोशल मीडिया पर पीड़िता के नाम से फर्जी प्रोफाइल (Fake Identity) तैयार की।
2. तस्वीरें वायरल कर किया ब्लैकमेल: उस फर्जी आईडी के जरिए आरोपी ने पीड़िता की बेहद निजी और संवेदनशील तस्वीरों को इंटरनेट पर सार्वजनिक (प्रसारित) कर दिया। इसका एकमात्र मकसद युवती को मानसिक रूप से इस कदर तोड़ देना था कि वह उसका मजहब अपनाने के लिए मजबूर हो जाए।
अदालत में दलीलों की जंग: क्यों नहीं मिली राहत?
जेल की सलाखों से बाहर आने के लिए आरोपी जुनैद अली ने कानून के हर दरवाजे को खटखटाया। निचली अदालतों से झटका खाने के बाद उसने हाईकोर्ट में अपनी तीसरी कोशिश की थी। लेकिन न्यायाधीश प्रवीर भटनागर की एकलपीठ के सामने आरोपी की तमाम दलीलें खोखली साबित हुईं।
सरकारी वकील और पीड़िता के पक्ष ने कोर्ट के सामने केस डायरी (पत्रावली) के वो पुख्ता डिजिटल साक्ष्य (Cyber Evidences) रखे, जिन्होंने आरोपी के दावों की हवा निकाल दी। अदालत ने मामले की गंभीरता को भांपते हुए स्पष्ट किया कि:
• रिकॉर्ड पर मौजूद सबूत साफ इशारा करते हैं कि यह महज कोई आम विवाद नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साइबर और सामाजिक अपराध है।
• पीड़िता की गरिमा को ठेस पहुंचाने और उस पर जबरन दबाव बनाने के लिए जिस तरह तकनीकी साधनों (IT Act के उल्लंघन) का इस्तेमाल हुआ, वह बेहद गंभीर है।
• इन हालातों में आरोपी को जमानत पर रिहा करना न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ होगा।
कानून का कड़ा संदेश
इस फैसले ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सोशल मीडिया को हथियार बनाकर किसी महिला को प्रताड़ित करने और जबरन धर्मांतरण के लिए मजबूर करने वालों के लिए कानून में कोई सहानुभूति नहीं है। आरोपी जुनैद फिलहाल केंद्रीय कारागार (Central Jail) में ही रहेगा और उसे अब सीधे ट्रायल (अदालती मुकदमे) का सामना करना होगा।