राजस्थानी भाषा को मिलेगा संस्थागत स्वरूप,गोविन्द गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय में स्थापित होगा ‘राजस्थानी भाषा अध्ययन केंद्र’
By
वीएसके डेस्क
August 03, 2026
समाचार › राजस्थान विविध
बाँसवाड़ा। गोविन्द गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय (जीजीटीयू), बाँसवाड़ा में ‘राजस्थानी भाषा अध्ययन केंद्र’ स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। माननीय राज्यपाल एवं कुलाधिपति के निर्देशों की अनुपालना में कुलगुरु प्रो. के. एस. ठाकुर ने इस संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए अध्ययन केंद्र की स्थापना के लिए सैद्धांतिक सहमति प्रदान की है तथा विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर आवश्यक प्रशासनिक एवं शैक्षणिक प्रक्रिया प्रारंभ करने के निर्देश दिए हैं।
कुलगुरु प्रो. ठाकुर ने बताया कि राजस्थानी भाषा राजस्थान के विशाल भू-भाग में बोली जाने वाली प्रमुख भाषा होने के साथ-साथ प्रदेश की समृद्ध संस्कृति, लोक परंपराओं एवं साहित्यिक विरासत की सशक्त प्रतिनिधि है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में मातृभाषा आधारित शिक्षा तथा भारतीय भाषाओं के संरक्षण, संवर्धन एवं अनुसंधान को विशेष महत्व दिया गया है। इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए विश्वविद्यालय में राजस्थानी भाषा अध्ययन केंद्र स्थापित किया जा रहा है ।
उन्होंने कहा कि इस अध्ययन केंद्र के माध्यम से राजस्थानी भाषा, साहित्य, लोक संस्कृति, लोककला, लोक इतिहास तथा वागड़ अंचल सहित प्रदेश की समृद्ध भाषाई परंपराओं पर अध्ययन, शोध, प्रकाशन, संगोष्ठियों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों एवं अन्य अकादमिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा। इससे विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं शिक्षकों को मातृभाषा आधारित अध्ययन एवं अनुसंधान के नए अवसर उपलब्ध होंगे।
कुलगुरु ने बताया कि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा अध्ययन केंद्र की स्थापना के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर उच्च शिक्षा विभाग एवं राजभवन को प्रेषित की जाएगी । साथ ही अध्ययन केंद्र के सुचारु संचालन के लिए आवश्यक वित्तीय, प्रशासनिक एवं शैक्षणिक संसाधनों के संबंध में भी प्रस्ताव प्रेषित किया जाएगा, ताकि आगामी बजट में इसके लिए आवश्यक वित्तीय प्रावधान सुनिश्चित किए जा सकें।
उन्होंने कहा कि यह निर्णय केवल एक नए अध्ययन केंद्र की स्थापना तक सीमित नहीं है, बल्कि राजस्थानी भाषा को उच्च शिक्षा एवं शोध के क्षेत्र में संस्थागत पहचान प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इससे भाषा के संरक्षण, संवर्धन एवं संवाहन के साथ-साथ भावी पीढ़ी तक उसके समृद्ध साहित्य, लोकज्ञान और सांस्कृतिक वैभव का प्रभावी हस्तांतरण सुनिश्चित होगा। यह पहल विश्वविद्यालय में भारतीय भाषाओं के संवर्धन तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगी।