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किसी भी समस्या का समाधान संवाद से संभव है, आंदोलन से विभाजन नहीं होना चाहिए – डॉ. मोहन भागवत

जेन-जी के प्रश्नों को केवल विरोध के रूप में न देखकर उनकी समस्याओं को समझकर उनका निवारण करना समाज और व्यवस्था की जिम्मेदारी

By वीएसके डेस्क August 07, 2026
समाचार › देश-विशेष
किसी भी समस्या का समाधान संवाद से संभव है, आंदोलन से विभाजन नहीं होना चाहिए – डॉ. मोहन भागवत
मुंबई, 6 अगस्त 2026। ‘इंडियाज इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस’ (I.I.M.U.N.) के 15वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित वार्षिक कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन समारोह में मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि किसी भी समस्या का समाधान संवाद के माध्यम से संभव है, समस्या का निवारण न होने पर संवैधानिक तरीके से आंदोलन करना उचित है। आंदोलन लोकतंत्र द्वारा दिया गया एक साधन होने के बावजूद उसका उपयोग अपनी विवेक बुद्धि से करना चाहिए, जिससे समाज में विभाजन न हो। मुंबई स्थित नीता मुकेश अंबानी सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित समारोह में देश के 100 से अधिक शहरों से 15 से 24 आयु वर्ग के 2,000 से अधिक छात्र उपस्थित रहे। भावी नेतृत्व तैयार करना, संवाद कौशल विकसित करना और राष्ट्रीय तथा वैश्विक प्रश्नों के विषय में युवाओं में एक सकारात्मक दृष्टिकोण का निर्माण करना कॉन्फ्रेंस का मुख्य उद्देश्य था। I.I.M.U.N. के संस्थापक ऋषभ शाह ने मोहन भागवत जी के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने छात्रों के मन के विभिन्न प्रश्न सरसंघचालक जी के सामने रखे। संवाद सत्र में डॉ. भागवत जी ने आंदोलन संस्कृति, शिक्षा व्यवस्था, सोशल मीडिया का युवाओं पर प्रभाव, LGBTQ विषय, महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण तथा विकसित भारत के लिए आवश्यक भावी नेतृत्व जैसे विभिन्न विषयों पर विस्तार से मार्गदर्शन किया।

आंदोलन संवाद का एक माध्यम होने के बावजूद उससे समाज में विभाजन पैदा नहीं होना चाहिए।

सरसंघचालक जी ने कहा कि आंदोलन संवाद का एक माध्यम होने के बावजूद उससे समाज में विभाजन पैदा नहीं होना चाहिए। भारतीय परंपरा की शास्त्रार्थ संस्कृति का उल्लेख करते हुए कहा कि जेन-जी के प्रश्नों को केवल विरोध के रूप में न देखकर उनकी समस्याओं को समझकर उनका निवारण करना समाज और व्यवस्था की जिम्मेदारी है। जेन-जी आंदोलन कर रही है, इसका मतलब यह नहीं कि वह राष्ट्र विरोधी है। नई पीढ़ी हमारे समाज का ही हिस्सा है और उसके साथ आत्मीयता से संवाद साधना आवश्यक है; उसी से आपसी सामंजस्य बढ़ता है। आज की जेन-जी और जेन-अल्फा पीढ़ी अधिक प्रामाणिक है।

शिक्षा जीवन की अनिवार्य आवश्यकता

शिक्षा विषय पर उन्होंने कहा कि शिक्षा जीवन की अनिवार्य आवश्यकता है और वह सभी के लिए सुलभ होनी चाहिए। शिक्षा की पूरी जिम्मेदारी सरकार की नहीं है, बल्कि उसकी जिम्मेदारी समाज को भी उठानी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार की आर्थिक सहायता के बिना भी विद्या भारती संस्था आज करीब 23 हजार स्कूल चला रही है। शिक्षा व्यवस्था में आंदोलनों के बिना भी सकारात्मक सुधार संभव है।

जेन-जी में सही-गलत की पहचान करने का विवेक विकसित करने के लिए मार्गदर्शन करना आवश्यक

सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी से सकारात्मक और समाज हित की जानकारी ही शेयर करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि केवल विश्वसनीय जानकारी पर विश्वास किया जाना चाहिए और जेन-जी में सही-गलत की पहचान करने का विवेक विकसित करने के लिए मार्गदर्शन करना आवश्यक है। जेन-जी को हिंसक नहीं, बल्कि सकारात्मक आदर्शों का अनुसरण करना चाहिए।

भारत संवाद से सद्भाव निर्माण करने में विश्वास रखता है

मोहन भागवत जी ने कहा कि भारत संवाद से सद्भाव निर्माण करने में विश्वास रखता है। संवाद और शांतिपूर्ण प्रयासों से ही स्थायी समाधान मिलता है। संघर्ष के समय नागरिकों को अपनी सरकार के साथ खड़ा रहना चाहिए। राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रश्नों पर सरकार के निर्णयों को समर्थन देना हर एक का कर्तव्य है। मानवता सर्वश्रेष्ठ है, यह संदेश महत्वपूर्ण है। दूसरों को जीतकर या समाप्त करके समाज आगे नहीं बढ़ता। समाज की प्रगति सुसंवाद, समन्वय और एक-दूसरे को समझने की प्रक्रिया से होती है, इसके लिए संवाद कायम रहना आवश्यक है।

एलजीबीटी (LGBT) समुदाय के व्यक्ति भी हमारे समाज का अभिन्न हिस्सा

उन्होंने कहा कि एलजीबीटी (LGBT) समुदाय के व्यक्ति भी हमारे समाज का अभिन्न हिस्सा हैं, समाज को उन्हें सम्मानपूर्वक स्थान देना चाहिए। प्राचीन भारतीय संस्कृति में विवाह केवल दो व्यक्तियों के साथ रहने की व्यवस्था नहीं मानी जाती है। विवाह का उद्देश्य उत्तम संतति का निर्माण और सुदृढ़, सुसंस्कारित समाज का निर्माण करना भी है। विवाह संस्था के मूल स्वरूप में बदलाव होने पर उसके कुछ सामाजिक दुष्परिणाम सामने आ सकते हैं, इसीलिए पहले समाज को इस विषय में जागृत करना आवश्यक है। कानून समाज तय नहीं करते, समाज की जरूरतों और मूल्यों के अनुसार कानून तय होते हैं। इस दृष्टिकोण से समलैंगिक विवाह को पारंपरिक अर्थों में विवाह न मानते हुए कंपैनियनशिप (सहचर्य) माना जाना चाहिए।

संघ की विभिन्न संस्थाओं में भी महिलाओं की उल्लेखनीय सहभागिता

महिलाओं की राष्ट्र निर्माण में समान भागीदार और नेतृत्व के लिए आगे लाने की आवश्यकता पर कहा कि अपर्याप्त जानकारी के कारण संघ के बारे में ऐसी धारणा है। संघ की विभिन्न संस्थाओं में महिलाओं को समानता के साथ जिम्मेदारियां सौंपी जा रही हैं और वे प्रभावी रूप से कार्य भी कर रही हैं। राष्ट्र सेविका समिति की स्थापना संघ की स्थापना के काल में ही हुई थी। अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में महिलाओं की सहभागिता होती है और निर्णय प्रक्रिया में भी उनकी भूमिका महत्वपूर्ण होती है। संघ की विभिन्न संस्थाओं में भी महिलाओं की उल्लेखनीय सहभागिता होती है।

उद्यमिता और कौशल भी रोजगार के महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं।

रोजगार को लेकर समाज की मानसिकता बदलनी चाहिए, रोजगार का अर्थ केवल नौकरी नहीं है। उद्यमिता और कौशल भी रोजगार के महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं। बेरोजगारी कम करने के लिए सभी प्रकार के कामों को समान सम्मान मिलना चाहिए। समाज में श्रम प्रतिष्ठा की भावना दृढ़ होनी चाहिए। श्रम प्रतिष्ठा को महत्व दिया जाना चाहिए तथा शिक्षा प्रणाली में उसी के अनुसार बदलाव करना जरूरी है।

आरक्षण के प्रश्न पर राजनीति नहीं होनी चाहिए

आरक्षण के विषय़ पर कहा कि सामाजिक विषमता के कारण आरक्षण की आवश्यकता निर्माण हुई। डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने इस विषय में स्पष्ट भूमिका रखी है। आरक्षण के प्रश्न पर राजनीति नहीं होनी चाहिए और सामाजिक न्याय के लिए उपाय प्रामाणिक रूप से तथा प्रभावी रूप से क्रियान्वित किए जाने पर भविष्य में आरक्षण की आवश्यकता कम हो सकती है।

नेतृत्व का वास्तविक कार्य केवल अनुयायी तैयार करना नहीं, बल्कि नए नेता गढ़ना है।

संयुक्त राष्ट्र के शाश्वत विकास लक्ष्यों की पूर्ति में भारत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। पर्यावरण के लिए पूरक विकास संभव है और पर्यावरण संवर्धन की शुरुआत घर से तथा दैनिक जीवन से ही होनी चाहिए। वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण हेतु कल के प्रत्येक नेता में आवश्यक गुणों के बारे में कहा कि सच्चा नेतृत्व स्वयं से शुरू करता है। जो खुद को सही दिशा दे सकता है, वही दूसरों को मार्गदर्शन कर सकता है। नेतृत्व का वास्तविक कार्य केवल अनुयायी तैयार करना नहीं, बल्कि नए नेता गढ़ना है।

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