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इतिहास से हौसला, तकनीक से चुनौती और लोककला से पहचान का संदेश

शेखावाटी साहित्य संगम के दूसरे दिन गुरु तेग बहादुर के बलिदान, युवा शक्ति और डिजिटल दौर की चुनौतियों पर मंथन; लोककला प्रतियोगिताओं में 200 से अधिक प्रतिभागियों ने दिखाई प्रतिभा

By वीएसके डेस्क October 10, 2026
समाचार › राजस्थान विविध
इतिहास से हौसला, तकनीक से चुनौती और लोककला से पहचान का संदेश
सीकर, 10 अक्टूबर। शेखावाटी साहित्य संगम के दूसरे दिन शनिवार को इतिहास, तकनीक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े विभिन्न विषयों पर विमर्श हुआ। सत्रों में गुरु तेग बहादुर के बलिदान की वर्तमान प्रासंगिकता, विकसित भारत में युवाओं की भूमिका, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और सोशल मीडिया के प्रभाव तथा शेखावाटी की पारंपरिक कला के संरक्षण पर विचार रखे गए। वहीं, लोककला प्रतियोगिताओं और नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से सामाजिक समरसता, शौर्य और स्वाभिमान के संदेश दिए गए। सालासर रोड स्थित गोविंदम रिसॉर्ट में श्री केशव संस्कृति प्रन्यास और पंडित दीनदयाल उपाध्याय शेखावाटी विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित संगम के प्रथम सत्र में ‘Gen Z, टेक्नोलॉजी और एल्गोरिद्म : विकसित भारत में भूमिका’ विषय पर चर्चा हुई। इसमें वर्ष 2047 के लक्ष्य, युवा शक्ति, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सोशल मीडिया और डिजिटल तकनीक के प्रभाव जैसे विषय शामिल रहे। सत्र के वक्ता कर्ण कटारिया थे, जबकि संचालन अनिल जी ने किया।

शेखावाटी की हवेलियां सांस्कृतिक विरासत की पहचान

‘लोकमंथन एवं लोकवस्तु’ सत्र में सुरेश कुमार नायक, सोनिया शर्मा और अतुल सैनी ने शेखावाटी की भित्तिचित्र कला, पारंपरिक स्थापत्य और ऐतिहासिक हवेलियों के संरक्षण पर विचार रखे। वक्ताओं ने प्राचीन चित्रकला तकनीकों, प्राकृतिक रंगों और स्थानीय कला परंपराओं को सहेजने की आवश्यकता बताई। सत्र का संचालन डॉ. सुनिधि मिश्रा ने किया।
शेखावाटी की हवेलियां सांस्कृतिक विरासत की पहचान

युद्ध केवल हथियारों से नहीं, हौसलों से भी लड़े जाते हैं

‘हल्दीघाटी से वैश्विक चुनौती तक : आज का भारत’ विषय पर महाराजा सूरजमल बृज विश्वविद्यालय, भरतपुर के कुलगुरु प्रो. मदन सिंह राठौड़ ने कहा कि इतिहास विपरीत परिस्थितियों में साहस और आत्मविश्वास बनाए रखने की प्रेरणा देता है। हल्दीघाटी के संघर्ष का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि युद्ध केवल हथियारों से नहीं, हौसलों से भी लड़े जाते हैं। उन्होंने नेतृत्व क्षमता और दूरगामी रणनीति के महत्त्व पर भी प्रकाश डाला। संचालन डॉ. हेमंत कुमार ने किया।

वास्तविक जीवन में सफलता का शॉर्टकट नहीं

‘रील, रियलिटी और सिनेमा’ सत्र में अभिनेता राहुल सिंह ने कहा कि सिनेमा युवाओं की सोच को प्रभावित करता है, लेकिन वास्तविक जीवन में सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं है। इसके लिए पढ़ाई और मेहनत जरूरी है। फिल्म लेखक सूर्यपाल ने भी युवाओं से आभासी दुनिया के आकर्षण के बीच अपने वास्तविक लक्ष्यों और जिम्मेदारियों को प्राथमिकता देने का आग्रह किया। सत्र का संचालन अभिमन्यु सिंह राठौड़ ने किया।

गुरु तेग बहादुर के बलिदान की प्रासंगिकता पर चर्चा

‘हिंद की चादर : गुरु तेग बहादुर जी और वर्तमान प्रासंगिकता’ विषय पर गुरु नानक देव विश्वविद्यालय, अमृतसर के कुलपति प्रो. (डॉ.) करमजीत सिंह मुख्य वक्ता रहे। सत्र में गुरु तेग बहादुर के जीवन, बलिदान और उनकी शिक्षाओं के वर्तमान समय में महत्त्व पर विचार-विमर्श हुआ। संचालन डॉ. बरखा ने किया।
गुरु तेग बहादुर के बलिदान की प्रासंगिकता पर चर्चा

लोकगीत और लोकनृत्य में दिखी राजस्थान की सांस्कृतिक झलक

संगम में आयोजित एकल लोकगीत, लोकनृत्य और पारंपरिक वेशभूषा प्रतियोगिताओं में 200 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। प्रस्तुतियों में राजस्थान की लोकसंस्कृति और पारंपरिक वेशभूषा की झलक देखने को मिली। लोकनृत्य प्रस्तुतियों को दर्शकों की सराहना मिली। रात्रिकालीन सत्र में जयपुर के युवतरंग संस्कृत नाट्य दल ने संत शिरोमणि गुरु रविदास के जीवन पर आधारित नाटक प्रस्तुत किया। स्वामी रामानंद से भेंट और ‘मन चंगा तो कठौती में गंगा’ की लोकप्रचलित कथा के माध्यम से श्रम की गरिमा, भक्ति और सामाजिक समानता का संदेश दिया गया। दीपक भारद्वाज द्वारा लिखित एवं निर्देशित इस नाटक में अर्जुन देव, संदीप कुमार शर्मा, भारत भारद्वाज, तुषार शर्मा और योगिता वेदी सहित अन्य कलाकारों ने अभिनय किया। दल की दूसरी प्रस्तुति ‘वीरांगना हीरा दे’ रही। जालौर की लोकप्रचलित शौर्यगाथा पर आधारित इस नाटक में कर्तव्य, साहस और स्वाभिमान को मंच पर प्रस्तुत किया गया। नाटक का लेखन डॉ. राकेश कुमार जैन और दीपक भारद्वाज ने किया, जबकि निर्देशन दीपक भारद्वाज का रहा।

पुस्तक मेले में साहित्य और इतिहास की पुस्तकों में रुचि

संगम परिसर में आयोजित पुस्तक मेले में साहित्य, इतिहास, भारतीय संस्कृति और समकालीन विषयों से जुड़ी पुस्तकें प्रदर्शित की गईं। विद्यार्थियों, साहित्य प्रेमियों और अन्य आगंतुकों ने पुस्तकों का अवलोकन किया और अपनी रुचि के अनुसार खरीदारी की। वैचारिक सत्रों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बीच पुस्तक मेले ने पाठकों को विभिन्न विषयों के साहित्य से जुड़ने का अवसर दिया।

रविवार को हनुमान सिंह राठौड़ और राजवीर सिंह चलकोई के सत्र

शेखावाटी साहित्य संगम के तीसरे दिन रविवार, 11 अक्टूबर को राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष हनुमान सिंह राठौड़ का व्याख्यान होगा। वहीं, स्प्रिंग बोर्ड से जुड़े इतिहास वक्ता राजवीर सिंह चलकोई ऐतिहासिक वीरों की पृष्ठभूमि पर विशेष सत्र में राजस्थान के इतिहास और वीर परंपरा से जुड़े प्रसंगों पर चर्चा करेंगे।

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