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मंदिरों का चढ़ावा आ रहा जनसेवा के काम: कहीं 16 गांवों की जिम्मेदारी, कहीं अस्पताल का खर्च; 10 करोड़ से सड़कें, 1000 विधवाओं को पेंशन

सांवलियाजी में 40 साल पहले 35 लाख से बना था अस्पताल, नाथद्वारा में डायलिसिस- दवाओं का खर्च उठा रहा मंदिर मंडल; खाटू में 8 करोड़ का स्कूल, पुष्कर में गोशाला और सड़क निर्माण

By चंद्रशेखर August 08, 2026
समाचार › राजस्थान विविध
मंदिरों का चढ़ावा आ रहा जनसेवा के काम: कहीं 16 गांवों की जिम्मेदारी, कहीं अस्पताल का खर्च; 10 करोड़ से सड़कें, 1000 विधवाओं को पेंशन
जयपुर। मंदिरों में चढ़ने वाला चढ़ावा सिर्फ पूजा-पाठ और धार्मिक आयोजनों तक सीमित नहीं है। राजस्थान के प्रमुख देवस्थलों में श्रद्धालुओं की आस्था से आने वाली राशि का उपयोग अब शिक्षा, चिकित्सा, सड़क, बिजली, गोसेवा और जरूरतमंदों की सहायता में भी हो रहा है। सांवलियाजी मंदिर मंडल ने आसपास के 16 गांवों के विकास की बागडोर संभाल रखी है तो वहीं नाथद्वारा में जिला अस्पताल की डायलिसिस और दवाओं का खर्च उठाया जा रहा है। खाटूश्यामजी में लगभग 1000 विधवाओं को मासिक पेंशन दी जा रही है और सरकारी स्कूल भवन पर 8 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। पुष्कर में सड़क से लेकर गोशाला तक के निर्माण में मंदिर प्रबंधन की भागीदारी है।

सांवलियाजी: 16 गांवों में 10 करोड़ से सड़कें, 40 साल पहले बनाया अस्पताल

चित्तौड़गढ़ जिले के सांवलियाजी मंदिर मंडल ने आसपास के 16 गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की बागडोर अपने स्तर पर संभाल रखी है। वर्तमान में इन गांवों में करीब 10 करोड़ रुपए की लागत से सड़कों के निर्माण और विकास कार्य चल रहे हैं। गांवों में हाईमास्ट लाइटें लगाई गई हैं। पिछले साल सात गांवों में करीब 4 करोड़ रुपए की लागत से सामुदायिक भवनों का निर्माण कराया गया। मंदिर मंडल की जनसेवा की यह परंपरा चार दशक पुरानी है। वर्ष 1987 में मंदिर मंडल ने 35 लाख रुपए खर्च कर अस्पताल भवन का निर्माण कराया था। मंदिर मंडल अध्यक्ष हजारीदास वैष्णव के अनुसार शिक्षा, चिकित्सा और जनोपयोगी कामों को लगातार प्राथमिकता दी जा रही है। मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान करने के साथ दिव्यांगों को स्कूटी भी उपलब्ध कराई जाती है। मंदिर मंडल करीब 3 हजार गायों की गोशाला का संचालन कर रहा है। 100 बटुकों के लिए वेद विद्यालय चल रहा है। श्रद्धालुओं के लिए रियायती भोजन और बालभोग की व्यवस्था है। धर्मशालाओं का निर्माण भी कराया गया है। अब आसपास के गांवों के मंदिरों के जीर्णोद्धार के प्रस्ताव भी लिए गए हैं।

नाथद्वारा: अस्पताल में डायलिसिस से लेकर बालिकाओं की शिक्षा तक जिम्मेदारी का निर्वहन

राजसमंद जिले के नाथद्वारा में श्रीनाथजी मंदिर मंडल धार्मिक गतिविधियों के साथ स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में भी सहयोग कर रहा है। मंदिर मंडल के सीईओ जितेंद्र पांडे के अनुसार जिला चिकित्सालय में डायलिसिस और दवाओं का खर्च मंदिर मंडल की ओर से वहन किया जा रहा है। बालिकाओं की शिक्षा के लिए गर्ल्स कॉलेज और गर्ल्स सीनियर स्कूल के भवन निर्माण में भी मंदिर मंडल ने सहयोग दिया है। कर्मचारियों के बच्चों को छात्रवृत्ति दी जाती है। स्थानीय निकाय को अग्निशमन वाहन, बिजली सब-स्टेशन और ग्रामीण हाट के लिए जमीन भी उपलब्ध कराई गई है। मंदिर मंडल की ओर से करीब तीन साल पहले गर्ल्स स्कूल का भवन भी बनवाया गया था। मंदिर की आय का एक हिस्सा सीधे शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी आवश्यकताओ पर खर्च हो रहा है।

खाटूश्यामजी: 1000 विधवाओं को हर महीने पेंशन, 8 करोड़ से सरकारी स्कूल

सीकर जिले के खाटूश्यामजी में श्री श्याम मंदिर कमेटी ने सामाजिक सुरक्षा और शिक्षा के क्षेत्र में कई जिम्मेदारियां संभाली हैं। कमेटी के अध्यक्ष शक्तिसिंह के अनुसार करीब 1000 विधवाओं को प्रतिमाह पेंशन दी जाती है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों के विवाह में भी सहयोग किया जाता है। सरकारी अस्पताल में चिकित्सा उपकरण उपलब्ध कराने के साथ जरूरतमंदों को नि:शुल्क दवाएं दी जाती हैं। गोशालाओं को सहायता, मंदिरों के जीर्णोद्धार और आपदा या दुर्घटना के समय राहत कार्यों में भी कमेटी की भागीदारी रहती है। शिक्षा के क्षेत्र में करीब 8 करोड़ रुपए की लागत से सरकारी स्कूल भवन का निर्माण कराया जा रहा है।

पुष्कर: पौने 14 करोड़ जमा राशि से 23 विकास के प्रस्ताव, 1.5 करोड़ की राशि से गोशाला निर्माण

अजमेर के पुष्कर स्थित ब्रह्मा मंदिर में भी श्रद्धालुओं से प्राप्त राशि का उपयोग विकास और जनसुविधाओं के लिए किया जा रहा है। मंदिर के बैंकों में जमा करीब पौने 14 करोड़ रुपए की राशि से विकास कार्यों के 23 प्रस्ताव लिए गए हैं। इनमें अंबे माता मंदिर का विकास, वाटरप्रूफिंग, आरओ और छाया व्यवस्था के साथ घाटों पर श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं से जुड़े काम शामिल हैं। ब्रह्म चौक से वराह घाट चौक तक करीब पौने एक किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण मंदिर प्रबंधन ने कराया है। सड़क में सैंड स्टोन का इस्तेमाल किया गया है। नगर परिषद की गोशाला के निर्माण पर भी मंदिर प्रबंधन ने करीब 1.5 करोड़ रुपए खर्च किए हैं।

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