लोकमंथन यात्रा का डिडाणिया में भव्य स्वागत, नशामुक्ति और पॉलीथीन मुक्त गांव का लिया संकल्प
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चंद्रशेखर
September 02, 2026
समाचार › राजस्थान विविध
डिडाणिया। लोकमंथन-2026 जयपुर के तहत वैचारिक संगठनों की ओर से निकाली जा रही लोकमंथन (लोक दर्शन) यात्रा का बुधवार को लोकदेवता बाबा रामदेव की पावन समाधि रामदेवरा से शुभारंभ हुआ। विधिवत पूजन और राष्ट्रघोष के साथ रवाना हुई यात्रा डिडाणिया पहुंची, जहां ग्रामीणों ने कलश यात्रा निकालकर यात्रा रथ का भव्य स्वागत किया। इस दौरान ग्रामीणों ने गांव को नशामुक्त और पॉलीथीन मुक्त बनाने का सामूहिक संकल्प लिया।
रामदेवरा में आयोजित शुभारंभ कार्यक्रम में भारतीय लोकजीवन, ज्ञान परंपरा, संस्कृति और सामाजिक चेतना से जुड़े विभिन्न विषयों पर वक्ताओं ने विचार रखे।
प्रज्ञा प्रवाह के राष्ट्रीय संयोजक जे. नंदकुमार ने भारतीय संवाद परंपरा की विशेषता बताते हुए कहा कि भारत में संवाद केवल दो व्यक्तियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों के साथ प्रकृति और समस्त जीव-जगत को भी व्यापक विमर्श का हिस्सा माना गया है। उन्होंने लोकज्ञान और शास्त्रीय ज्ञान को भारतीय ज्ञान परंपरा के परस्पर पूरक आयाम बताया।
लोक परंपराओं की झलक, वृक्षारोपण भी
रामदेवरा से रवाना होकर यात्रा डिडाणिया पहुंची। ग्रामीणों ने कलश यात्रा के साथ यात्रा रथ का स्वागत किया। बिडाणियों की ढाणी में पारंपरिक वस्तुओं की प्रदर्शनी लगाई गई। इसके बाद देवगिरीजी मंदिर में दर्शन कर मंदिर परिसर में वृक्षारोपण किया गया।
सांस्कृतिक कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों ने भारत माता के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया। आदर्श विद्या मंदिर की छात्राओं ने स्वागत गीत और नृत्य प्रस्तुत किया। बाबा रामदेव पर आधारित लोकनाट्य ने भी दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। मांगीलाल एवं उनकी टीम ने लोकभजनों की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम के माध्यम से स्थानीय लोकभाषा, लोकगीत, पारंपरिक वेशभूषा, लोकवाद्य और लोककलाओं के संरक्षण का संदेश दिया गया।
नशामुक्ति और सामाजिक समरसता पर जोर
यात्रा संयोजक डॉ. सत्यनारायण कुमावत ने कहा कि लोकमंथन भारतीय परंपरा, संस्कृति, रीति-रिवाज और लोकविरासत के पुनरुत्थान से जुड़ा अभियान है। उन्होंने कहा कि राजस्थान के लोकजीवन में प्रकृति संरक्षण, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक जीवन के अनेक महत्वपूर्ण सूत्र मौजूद हैं।
रिछपाल गंगानगर ने नशे को युवा शक्ति के सामने गंभीर चुनौती बताते हुए नशामुक्त समाज के निर्माण का आह्वान किया। मुख्य वक्ता जसवंत खत्री ने बच्चों में संस्कार, चरित्र और श्रद्धा के विकास पर जोर दिया। उन्होंने सामाजिक समरसता के लिए जातिगत अहंकार और हीनभावना से ऊपर उठकर आत्मीयता का भाव विकसित करने की आवश्यकता बताई।
160 कपड़े के थैले बांटे, पॉलीथीन छोड़ने का आह्वान
पर्यावरण संरक्षण के संदेश को व्यवहार से जोड़ते हुए बहिन मीना खत्री की ओर से ग्रामीणों को 160 कपड़े के थैले वितरित किए गए। ग्रामीणों से पॉलीथीन के स्थान पर कपड़े के थैलों का उपयोग करने का आह्वान किया गया।
कार्यक्रम में जल संरक्षण, दहेज प्रथा का विरोध, नारी सम्मान, मातृभाषा एवं स्थानीय बोली के संरक्षण तथा मोबाइल और रील संस्कृति के संयमित उपयोग जैसे सामाजिक विषयों पर भी लोक प्रस्तुतियों के माध्यम से संदेश दिया गया।
कार्यक्रम के समापन पर ग्रामीणों ने डिडाणिया को नशामुक्त एवं पॉलीथीन मुक्त गांव बनाने का सामूहिक संकल्प लिया। इसके बाद लोकमंथन यात्रा अपने अगले पड़ाव जैसलमेर के लिए रवाना हुई।