Breaking News
VSK Foundation Jaipur Logo - विश्व संवाद केंद्र जयपुर
विश्व संवाद केंद्र, जयपुर ( VSK Foundation Jaipur )

धर्म और मानवीय मूल्यों की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान का स्मरण

गुरु तेग बहादुर जी की 350वीं शहादत वर्षगांठ पर 21 सितंबर को RIC में विशेष व्याख्यान, डॉ. कृष्ण गोपाल होंगे मुख्य वक्ता

By वीएसके डेस्क September 07, 2026
समाचार › राजस्थान विविध
धर्म और मानवीय मूल्यों की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान का स्मरण
जयपुर। सिख परंपरा के नवें गुरु श्री गुरु तेग बहादुर जी की 350वीं शहादत वर्षगांठ के अवसर पर राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर के श्री गुरु गोबिंद सिंह चेयर फॉर नेशनल इंटीग्रेशन एंड सिख स्टडीज के तत्वावधान में 21 सितंबर, 2026 को राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर (RIC), जयपुर में विशेष व्याख्यान का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल होंगे। कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर प्रारंभिक बैठक आदर्श विद्या मंदिर, राजा पार्क, जयपुर में हुई। बैठक में आयोजन की रूपरेखा, कार्यक्रम की व्यवस्थाओं तथा विभिन्न सामाजिक वर्गों की सहभागिता सहित अनेक विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। बैठक में सिख समाज के सरदार जसबीर सिंह, ओंकार सिंह, राजन सिंह, सुबी गुरदित्ता, मंजीत कौर, गुरमीत सिंह बग्गा, मनु कम्बोज, एडवोकेट गुरविंदर कंबोज सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। धार्मिक स्वतंत्रता और मानवीय गरिमा के प्रहरी श्री गुरु तेग बहादुर जी भारतीय इतिहास और परंपरा में धार्मिक स्वतंत्रता, मानवीय गरिमा, निर्भयता और सामाजिक एकात्मता के अद्वितीय प्रतीक के रूप में स्मरण किए जाते हैं। उन्होंने अत्याचार और धार्मिक कट्टरता के सामने झुकने के बजाय धर्म एवं मानवीय मूल्यों की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। उनका जीवन यह संदेश देता है कि धर्म की स्वतंत्रता केवल अपने लिए नहीं, बल्कि दूसरों के विश्वास और अधिकारों की रक्षा के लिए भी खड़े होने का दायित्व है। इसी कारण उनका आत्मोत्सर्ग भारतीय इतिहास में मानवीय स्वतंत्रता और नैतिक साहस की एक विलक्षण मिसाल माना जाता है। ‘भै कहु को देत नाहि, न भय मानत आनि’ का संदेश विशेष व्याख्यान का उद्देश्य श्री गुरु तेग बहादुर जी की शहादत के ऐतिहासिक, दार्शनिक और सामाजिक आयामों पर विमर्श करना तथा उनके जीवन और विचारों की समकालीन प्रासंगिकता को समझना है। गुरु तेग बहादुर जी की वाणी का संदेश— “भै कहु को देत नाहि, न भय मानत आनि” मनुष्य को न किसी को भयभीत करने और न स्वयं भयभीत होने की प्रेरणा देता है। यह भाव निर्भयता, आत्मसम्मान और दूसरों के अधिकारों के सम्मान की व्यापक भारतीय दृष्टि को अभिव्यक्त करता है। 350वीं शहादत वर्षगांठ का यह आयोजन श्री गुरु तेग बहादुर जी के जीवन, विचार और आत्मोत्सर्ग को स्मरण करने के साथ-साथ धार्मिक स्वतंत्रता, सामाजिक समरसता, मानवीय गरिमा और राष्ट्रीय एकीकरण जैसे मूल्यों पर व्यापक विमर्श का अवसर प्रदान करेगा।

Related Articles

शिक्षक का लक्ष्य केवल नौकरी नहीं, राष्ट्र निर्माण हो: विक्रांत खंडेलवाल

एसएसजी पारीक कॉलेज में ‘आरोहण’ समारोह, पत्रिका ‘पीयूष’ का विमोचन और डांडिया महोत्सव ‘डांडिया धूम’ आयोजित

Oct 17, 2026

संत रविदास के बेगमपुरा से एआई तक, भविष्य के भारत पर मंथन

शेखावाटी साहित्य संगम के अंतिम दिन चार सत्रों में संत साहित्य, शिक्षा, इतिहास और राष्ट्रबोध पर चर्चा; राजस्थानी भाषा को व्यवहार में अपनाने पर जोर

Oct 11, 2026

इतिहास से हौसला, तकनीक से चुनौती और लोककला से पहचान का संदेश

शेखावाटी साहित्य संगम के दूसरे दिन गुरु तेग बहादुर के बलिदान, युवा शक्ति और डिजिटल दौर की चुनौतियों पर मंथन; लोककला प्रतियोगिताओं में 200 से अधिक प्रतिभागियों ने दिखाई प्रतिभा

Oct 10, 2026